रायपुर

पूरे देश में लगा सूतक, ग्रहण रात 9.58 बजे से
07-Sep-2025 6:17 PM
पूरे देश में लगा सूतक, ग्रहण रात 9.58 बजे से

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 7 सितंबर। खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए आज 7 सितंबर का दिन खास होगा। इस दिन साल का दूसरा पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जो भारत सहित एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमेरिका के कई हिस्सों में दिखाई देगा। यह ग्रहण रात 9:58 बजे शुरू होकर 8 सितंबर को रात 1:26 बजे तक रहेगा। इस दौरान चंद्रमा लाल रंग में नजर आएगा, जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।

 चंद्र ग्रहण तब होता है, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आते हैं, और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। पूर्णिमा के दिन होने वाली यह घटना तीन प्रकार की होती है। पूर्ण, आंशिक और उपछाया चंद्र ग्रहण। पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आता है। ब्लड मून तब बनता है, जब पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की लाल रोशनी को चंद्रमा तक पहुंचाता है।

 सूतक काल का समय ज्योतिषियों के अनुसार, चंद्र ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इसीलिए 7 सितंबर को दोपहर 12:59 बजे से सूतक काल प्रभावी होगा। सूतक काल शुरू होने से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक ध्यान और मंत्र जाप करना चाहिए, जो बहुत शुभ माना जाता है। इस दौरान भगवान की मूर्तियों को स्पर्श करने और यात्रा करने से बचें, क्योंकि इससे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

डॉ. मिश्र बोले- इसके साक्षी बने अंधविश्वास में न पड़ें

रायपुर, 7 सितंबर। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा है कि चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है। प्रारंभ में यह माना जा रहा था कि चंद्रग्रहण राहू-केतू के चंद्रमा को निगलने से होता है, जिससे धीरे-धीरे विभिन्न अंधविश्वास व मान्यताएं जुड़ती चली गईं, लेकिन बाद में विज्ञान ने यह सिद्ध किया कि चंद्रग्रहण पृथ्वी की छाया के कारण होता है। जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है तब उसका एक किनारा जिस पर छाया पडऩे लगती है काला होना शुरू हो जाता है जिसे स्पर्श कहते हैं। जब पूरा चंद्रमा छाया में आ जाता है तब पूर्णग्रहण हो जाता है। जब चंद्रमा का पहला किनारा दूसरी ओर छाया से बाहर निकलना शुरू होता है तो ग्रहण छूटना शुरू हो जाता है। जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी की छाया से बाहर आ जाता है तो ग्रहण समाप्त हो जाता है जिसे ग्रहण का मोक्ष कहते हैं।

डॉ. दिनेश मिश्र के अनुसार कुछ लोगों ने इस चंद्र ग्रहण के रंग को लेकर इसे खूनी चंद्र ग्रहण कहा और इसके दुष्प्रभाव की आशंका जाहिर की है पर यह सब आशंकाएं और भविष्यवाणियां सही नहीं हैं. वास्तव में चंद्र ग्रहण में पूर्णता के दौरान चंद्रमा का लाल रंग पृथ्वी के किनारे के चारों ओर वायुमंडल से होकर गुजरने वाले सूर्य के प्रकाश के कारण होता है। हमारा वायुमंडल सूर्य के प्रकाश की नीली किरणों को दूर कर देता है, और प्रकाश की लाल तरंगदैर्ध्य पृथ्वी की छाया में चली जाती है। आप सूर्यास्त से ठीक पहले भी इस प्रभाव को देख सकते हैं: उस समय, सूर्य का प्रकाश बहुत सारी हवा से होकर गुजर रहा होता है, नीली तरंगदैर्ध्य को बिखेर रहा होता है और लाल तरंगदैर्ध्य को छोड़ रहा होता है। चंद्र ग्रहण के बारे में सोचें, जो आपको उसी क्षण पृथ्वी के पूरे किनारे पर होने वाले सामूहिक सूर्योदय और सूर्यास्त का रंग दिखाता है।


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