रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 1 सितंबर। रविवार को अमलतास केसल, कचना स्थित श्री 1008 मुनिसुव्रत नाथ मंदिर में चल रहे दसलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस पर उत्तम शौच धर्म मनाया गया।जिसके अंतर्गत प्रात: 7. 25 बजे 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान को पांडुक शिला पर विराजमान कर अभिषेक, शांति धारा की गई, जिसमे प्रथम शांति धारा कुलदीप सिंघई ,दिव्तीय प्रकाश छाबड़ा तृतीय नीरज बाकलीवाल परिवार एवम चतुर्थ डॉ. प्रणय अनिल जैन परिवार ने किया। 1008 श्री पुष्पदंत भगवान के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। उपरोक्त जानकारी मंदिर के अध्यक्ष हिमांशु जैन ने दी।
उत्तम शौच धर्म की विवेचना करते हुए भाई सुरेश मोदी ने बताया कि शौच धर्म का अर्थ है कि शुचिता रखना अर्थात मन से वचन से काय से अपनी आत्मा को पवित्र करना, पवित्रता से अनुराग रखिए , लोभ( लालच ) का कोई अंत नही जिस प्रकार मृग कस्तूरी के लोभ में जीवन भर भटकता है, वैसे ही मानव लोभ से आत्मा को दूषित करता हैऔर इस मोह रूपी संसार में भ्रमण करता रहता है, लोभ से मुक्त निर्मल आत्मस्वरूप ही उत्तम शौच धर्म है। वीरा महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमति शशि पालीवाल ने बताया कि रविवार को हुए चित्रकला ( ड्रॉइंग ) प्रतियोगिता में दोनों ग्रुप को मिला कर 14 बच्चों ने भाग लिया।


