रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 18 अगस्त। स्नातकोत्तर में गैर भूगोल वाले छात्रों को भी प्रवेश न देने को लेकर पुराने अध्यादेश का विरोध शुरू हो गया है। प्राचार्यों और विभागाध्यक्षों की ओर से उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर अध्यादेश में संशोधन कर अनुमति की मांग की गई है।
प्राचार्य दूधाधारी गल्र्स कॉलेज ने आयुक्त उच्च शिक्षा शिक्षा को पत्र लिखा है। इसमें भूगोल स्नातकोत्तर कक्षा में प्रवेश की आर्हता में संशोधन (स्नातक में गैर भूगोल विषय के छात्रों को भूगोल स्नातकोत्तर में प्रवेश की अनुमति मांगी है। भूगोल स्नातकोत्तर में प्रवेश हेतु स्नातक स्तर पर भूगोल विषय होना अनिवार्य है। यह छग उच्च शिक्षा विभाग की प्रवेश मार्गदर्शिका में उल्लेखित है। भूगोल विषय की उपयोगिता, मांग तथा महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रवेश की आर्हता में संशोधन करने पर छात्र लाभान्वित हींगे और यह छात्रों के हितों में उचित होगा। यानी स्नातक स्तर पर गैर भूगोल के छात्रों को भूगोल स्नातकोत्तर में प्रवेश दिया जाये जैसा कि अन्य विषयों में दिया जाता है। प्राचार्य का कहना है कि विज्ञान और भूगोल का गहरा संबंध है। कुछ विषय जैसे भू -विज्ञान, सिविल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्टर आदि एक-दूसरे से अंतर संबंधित है। (सर्वेक्षण, भू आकृति विज्ञान एवं जल वायु विज्ञान आदि पेपर) विद्यार्थी भूगोल विषय को लेकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं इसलिए उनकी मांग होती है कि भूगोल स्नातकोत्तर में प्रवेश मिल सके।कुछ महाविद्यालय में भूगोल विषय नहीं होने के कारण भूगोल विषय स्नातक में प्रवेश नहीं ले पाते हैं, ऐसे स्थिति में भी भूगोल स्नातकोत्तर प्रवेश की आर्हता पूर्ण नहीं कर पाते हैं और प्रवेश से वंचित रह जाते हैं। तकनीकी विषय (इंजिनियरिंग व अन्य) के छात्रों को विश्वविद्यालय से प्रवेश पात्रता नहीं मिलने के कारण प्रवेश से वंचित रह जाते हैं, जबकि उन्हीं विद्यार्थियों को अन्य विषय में प्रवेश की पात्रता होती है।भूगोल स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में छात्रों की संख्या निरंतर घट रही है। उपरोक्त संशोधन करने पर इसमें वृद्धि होगी तथा छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में इसे वैकल्पिक विषय लेकर सफल होने की संभावनाएँ बढ़ जायेगी क्योंकि विज्ञान, इंजीनियरिंग, स्नातक के छात्र अखिल भारतीय सेवा एवं राज्य लोक सेवा में बेहतर विकल्प के रूप में भूगोल विषय का चयन करते हैं।मार्गदर्शिका की कंडिका 9.4 (क) के अनुत्तार समस्त कक्षाओं एवं पाठ्यक्रमों में आयु सीमा के बंधन को समाप्त किया गया है। जिससे भूतपूर्व विद्यर्थियों को भूगोल में प्रदेश की पात्रता होगी। ज्ञात हो कि एनईपी लागू हो चुका है अत: गैर भूगोल के छात्र-छात्राओं को भूगोल लेने एवं पढऩे की शीघ्रातिशीघ्र अनुमति देने नियमावली में संशोधन करना आवश्यक होगा। जिसके स्नातक में जिन्होने भूगोल नहीं कृपया शीघ्रातिशीघ्र की कक्षा में प्रवेश लेने की अनुमति ले सके।


