रायपुर
अब यूजी में भूगोल होने पर ही पीजी में प्रवेश
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 17 अगस्त। छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भूगोल पाठ्यक्रम खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है। इसके मुताबिक अब भूगोल में स्नातक उत्तीर्ण ही स्नातकोत्तर कर पाएंगे। इस व्यवस्था से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उस प्रावधान को भी झटका लगा है जिसमें कोई भी विद्यार्थी किसी भी विषय में स्नातक कर सकता है।
मिली जानकारी के अनुसार नए सत्र के लिए जारी प्रवेश मार्गदर्शिका में स्पष्ट किया गया है कि कोई विद्यार्थी जिस विषय में स्नातक किया हो उसे उसी विषय में स्नातकोत्तर के लिए प्रवेश दिया जाए। वह भी केवल भूगोल पाठ्यक्रम के लिए यह अनिवार्य किया गया है। यानी, बीकाम बीएससी उत्तीर्ण, भूगोल में पीजी कर सकते थे। यहां तक कि कुछ इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के भूगोल में पीजी करने के दृष्टांत है। इसके पीछे संघ या राज्य लोकसेवा, नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय, राज्य के स्कूलों में शिक्षक चयन लक्ष्य रहता था। अभी भी प्रदेश के सरकारी कालेजों में भूगोल की मांग है? बड़ी संख्या में एडमिशन के लिए आवेदन जमा होते हैं लेकिन स्नातक में भूगोल न होने से पीजी में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।
बताया गया है कि हर वर्ष 20 से अधिक विद्यार्थी भूगोल में एम ए करने के लिए आवेदन देते रहे हैं लेकिन भूगोल में स्नातक न होने से एडमिशन नहीं दिया जा रहा। कालेजवार मिली जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ कालेज में सत्र 25 के लिए 10, और 24 में 20 आवेदन गैर भूगोल उत्तीर्ण ने आवेदन किया था। इसी तरह से अभनपुर कालेज में इस वर्ष 15,और 24 में 12, दूधाधारी गर्ल्स कॉलेज में भी नान जियोलाजी वाले 20सेअधिक आवेदन मिले। लेकिन यहां एडमिशन 25 में 5, और 24 में 2 को ही दिया गया । वहीं दुर्गा कालेज (निजी) में भी 20-25 प्राप्त आवेदनों में से वर्ष 25-3 और 24-4 को ही एडमिशन मिल पाया।
कॉलेज के प्राध्यापकों ने बताया कि नई शिक्षा नीति पूरी तरह से लागू हो जाने के बाद भी उच्च शिक्षा विभाग एक दशक से अधिक पुरानी व्यवस्था को नहीं बदल रहा है। जिससे भूगोल पाठ्यक्रम का भविष्य संकट में है। एनईपी,इंटरडिसीप्लीनरी एजुकेशन कैरिकुलम को बढ़ावा देता है। यानी कोई भी छात्र छात्राएं, किसी भी विषय में यूजी करने के बाद पीजी अपनी पसंद के विषय में कर सकेगा। लेकिन छत्तीसगढ़ में अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। और दस वर्ष पुराने प्रवेश मार्गदर्शिका के प्रावधान लागू है। बताया गया है कि यह व्यवस्था नौकरी से बर्खास्त हुए आईएएस बीएल अग्रवाल सचिव उच्च शिक्षा और एक महिला अपर संचालक ने लागू कराया था जो प्रदेश के विद्यार्थियों के भविष्य को अंधकार में डाल दिया है। साथ ही इस विषय के खत्म होने पर भी संकट गहरा गया है।


