रायपुर
न कांट्रेक्ट एक्सटेंशन हुआ न कोई अधिकृत पत्र
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 9 अगस्त। आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के क्लेम प्रोसेसिंग को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। छत्तीसगढ़ में यह काम ऐसी एजेंसी कर रही है जिसे राजस्थान में जून में टर्मिनेट करते हुए नेशनल हेल्थ अथारिटी (एनएचए) को सूचित कर, अन्य राज्यों के लिए भी आगाह किया था। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि छत्तीसगढ़ में इस एजेंसी को बिना किसी अधिकृत पत्र के काम दिया गया है।
यह एजेंसी आयुष्मान और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत मुफ्त रियायती इलाज करने वाले सरकारी निजी अस्पतालों के मेडिकल बिल क्लेम का प्रोसेसिंग करती है। एमडी इंडिया टीपीए छत्तीसगढ़ में मार्च तक यह काम अधिकृत तौर पर कर रही थी। लेकिन नए वित्त वर्ष से बिना किसी आधिकारिक आदेश, अनुबंध पत्र के काम कर रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसे कांट्रेक्ट एक्सटेंशन लेकर भी अब तक नहीं दिया गया है। जो कई तरह की अनियमितता और उसमें विभागीय अमले की मिली भगत पर संदेह पैदा कर रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार? एमडी इंडिया पर राजस्थान में क्लैम को लेकर बड़े फ्राड के आरोप लगे थे। इसकी जांच के बाद राजस्थान सरकार ने 13 जून को उसके अनुबंध को टर्मिनेट करते हुए अगले तीन साल किसी भी तरह के टेंडर में शामिल होने के लिए भी डिबार कर दिया। इसके साथ ही राजस्थान सरकार ने एनएचए को पत्र लिखकर एमडी इंडिया के अन्य राज्यों में चल रहे काम की समीक्षा करने कहा है। राजस्थान के इस पत्र को एनएचए ने अन्य राज्यों को भेजकर आगाह किया था । साथ राज्यों से एमडी इंडिया की गतिविधियों पर रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन छत्तीसगढ़ में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
यह एजेंसी राज्य में बिना अधिकृत पत्र या अनुबंध के 1653 निजी और सरकारी अस्पताल के क्लेम क्लीयर कर रही है। जो सैकड़ों करोड़ के होते हैं। इसके एवज में प्रोसेसिंग कमीशन के रूप में कंपनी को 32.73 रूपए प्रति क्लेम दिए जाते हैं। कंपनी हर महीने औसतन 1.20 से 1.25 लाख क्लेम निपटाती है। इसे हर महीने 40-90 लाख और हर वर्ष 4.90 करोड़ की बिलिंग होती है।
यह भी बता दें कि नई एजेंसी के चयन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की है जो अब तक पूरी नहीं हो पाई है। इसमें भी एक ही कंपनी रह गई है। इसके चलते यह कंपनी अनाधिकृत रूप से काम कर रही हैं। इसे लेकर कहीं न कहीं इस कंपनी के इंफ्लूएंस पर भी संदेह जताया जा रहा है।
एनएचए ने अपनी ही चि_ी वापस ली
इस बीच शनिवार को एनएचए ने आश्चर्यजनक रूप से सभी राज्यों को जारी अपने इस पत्र को वापस (विदड्रॉ) ले लिया है। उसका कहना है कि एनएचए को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करे। यह काम इरडा (बीमा कंपनी नियामक)कर सकती हैं। एनएच का यह पत्र भी कई संदेह पैदा करता है। क्योंकि कंपनी चयन की आमंत्रित निविदा में यह प्रमुख शर्त रखी गई थी कि एजेंसी किसी राज्य या केंद्र सरकार से ब्लैकलिस्ट न हो।


