रायपुर

सीडीबीई के गैर सदस्यों ने फर्म के लेटरपेड गलत उपयोग कर ट्रांसफर-निलंबन आदेश जारी किया, सात पर एफआईआर
20-Jun-2025 6:13 PM
सीडीबीई के गैर सदस्यों ने फर्म के लेटरपेड गलत उपयोग कर ट्रांसफर-निलंबन आदेश जारी किया, सात पर एफआईआर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 20 जून। छत्तीसगढ डायसिस बोर्ड अॅाफ एजूकेशन का चेयरमेन और सचिन बताकर संस्था के लेटरपेड का गलत उपयोग कर पूर्व में संस्था से संबध स्कूलों के कर्मचारियों और और प्रचार्य के लबादले निलंबन के फर्जी आदेश जारी, और थाना में लेटरपेड के माध्यम से एफआईआर दर्ज कराने वाले सात लोगों पर सिविल लाइन पुलिस ने कार्रवाई किया है। शिकायत पर जयदीप राबिनसन, नितीन लारेंश रूपिका लारेंस, एसके नंदा अजय, उमेश जेम्स और बीके नायक के खिलाफ 420, 467, 468, 471 और 34 के तहत अपराध दर्ज किया गया।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक कटोरातालाब निवासी यशराज सिंग और अन्य लोगों की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। पुलिस ने यशराज के जुलाई 2024 का पत्र का अवलोकन किया। जिसमें  आवेदक यशराज सिंग एवं अन्य द्वारा शिकायत जांच में आवेदक यशराज सिंह के सलग्न दस्तावेज का अवलोकन करने पर प्रथम दृष्टया में अपराध का घटित होना पाया गया। उक्त शिकायत पर कार्रवाई कर आरोपीयान जयदीप राबिनसन , नितीन लारेंस , रूपिका लारेंश , एस के नंदा , अजय उमेश जेम्स  एवं बी के नायक के विरूद्ध अपराध धारा 420,467,468,471 ,34 भादवि का अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया। विवेचना में पाया गया कि नितिन लॉरेंस निवासी लोधीपारा, के द्वारा एक फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई थी जो कि फर्जी निकला।  शिकायत में नितिन लॉरेंस ने अपने आपको वाईस चेयरमेन (उपाध्यक्ष) और जयदीप रॉबिनसन सचिव छत्तीसगढ डायसिस बोर्ड आफ एजूकेशन सी.डी.बी.ई का होना बताया गया था। पुलिस की जांच में उक्त दोनों व्यक्ति इस पद पर नही थे। और उनके द्वारा गलत लेटर पेड का इस्तेमाल करके गलत जानकारी दिया गया।

जयदीप रॉबिसन के द्वारा एक साल से संस्था के लेटर पैड का गलत इस्तेमाल मिशन के स्कूलों के शिक्षकों प्रचार्यो और कमचारियों के निलंबन आदेश जारी किया गया। जो कि अपराधिक कृत्य है। छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड आफ एजूकेश्न के अधिन कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि नितिन लॉरेंस एवं जयदीप रॉबिसन किसी भी पद पर नहीं है। पूर्व में भी  नितिन लॉरेस  जयदीप रॉविसन बिशप एस. के. नंदा के गलत कार्यों को थानों में एवं उच्च अधिकारीगणों के पास भी शिकायत किया गया था। जिसपर कोई कार्रवाइ नहीं हुई।


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