रायपुर
बीपी पुजारी स्कूल में विधायक पुरंदर मिश्रा
बिजली, पानी, टूटे फर्नीचर की समस्या जस की तस, गणवेश की अनुपलब्धता के बीच नया सत्र शुरू
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 16 जून। छत्तीसगढ़ में सोमवार से नया शिक्षा सत्र शाला प्रवेश उत्सव के साथ शुरू हो गया। पहले दिन विधायक मंत्री, अन्य जनप्रतिनिधियों ने स्कूलों में बच्चों को तिलक लगा मुंह मीठा कर स्वागत किया। और कई स्कूलों में बच्चों को पाठ्य पुस्तकों का वितरण भी किया गया।
वहीं बड़ी संख्या में स्कूलों में टूट फूट, पेयजल-बिजली फर्नीचर और लैब में प्रायोगिक सामानों की कमी के बीच सत्र शुरू हुआ तो बच्चों को निशुल्क गणवेश न मिलने की भी शिकायतें मिली। वहीं शिक्षा विभाग का दावा है कि राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बढ़ाने स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की एक व्यापक और सार्थक पहल की है।
राज्य के लगभग 212 प्राथमिक शालाएं और 48 पूर्व माध्यमिक शालाएं पूरी तरह से शिक्षक विहीन थीं, जबकि 6,872 प्राथमिक शालाएं और 255 पूर्व माध्यमिक शालाएं केवल एक शिक्षक के साथ संचालित हो रही थीं। इसके अतिरिक्त 211 शालाएं ऐसी थीं जहाँ छात्र संख्या शून्य थी, लेकिन शिक्षक पदस्थ थे। इसके अलावा, 166 शालाओं को समायोजित किया गया, इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की 133 शालाएं शामिल थीं, जिनकी दर्ज संख्या 10 से कम थी और दूरी 1 किमी से कम थी, तथा शहरी क्षेत्रों की 33 शालाएं थीं, जिनकी दर्ज संख्या 30 से कम थी और दूरी 500 मीटर से कम थी।
इन चुनौतियों के बावजूद, छत्तीसगढ़ का छात्र-अध्यापक अनुपात (पीटीआर) राष्ट्रीय औसत से उल्लेखनीय रूप से बेहतर था, प्राथमिक शालाओं के लिए पीटीआर-20 था, जबकि राष्ट्रीय औसत 29 है और पूर्व माध्यमिक शालाओं के लिए पीटीआर-18 था, जबकि राष्ट्रीय औसत 38 है। हालांकि, वितरण असमान था। राज्य में लगभग 17,000 प्राथमिक शालाएं और लगभग 4,479 पूर्व माध्यमिक शालाएं थीं, जिनका पीटीआर-20 से कम था। अकेले शहरी क्षेत्रों में 527 ऐसे विद्यालय थे, जिनका पीटीआर-10 से कम था, जिनमें 15 या उससे अधिक शिक्षकों वाली 08 प्राथमिक शालाएं, 10-15 शिक्षकों वाली 61 शालाएं और 6-9 शिक्षकों वाली 749 प्राथमिक शालाएं थीं, ये आंकड़े बेहतर संसाधन आवंटन की जरूरत को दर्शाते हैं।
इस पहल का मुख्य बिंदु एक ही परिसर में संचालित लगभग 10 हजार 372 शालाओं का एकीकरण था, जिनमें प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल थे। जिला स्तर पर लगभग 13 हजार 793 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया। संभाग स्तर पर 863 का और राज्य स्तर पर 105 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया। इसके पश्चात एकल शिक्षकीय शालाओं की संख्या में प्रभावशाली 80 प्रतिशत की कमी आई है अब लगभग 1,200 शालाएं एकल शिक्षकीय हैं। एक ही परिसर में स्थित 10,372 विद्यलायों का एकीकरण और 166 ग्रामीण एवं शहरी विद्यालयों का समायोजन पूरा हो चुका है। इससे लगभग 89 प्रतिशत विद्यार्थियों को बार-बार प्रवेश प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी।
पांच दिन के लिए स्कूल 7-11 बजे तक
इस बीच स्कूल शिक्षा विभाग ने अगले पांच दिन के लिए सभी शासकीय, गैर सरकारी स्कूलों के समय में बदलाव किया है। यह बदलाव गर्मी के प्रभाव और बच्चों की सेहत को देखते हुए किया गया है। 17-21 जून तक कक्षाएं केवल एक पाली में सुबह 7-11 बजे तक लगेगी। 23जून से सामान्य दिनों की तरह पढ़ाई होगी।
खूब मन लगाकर पढिय़े -साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बच्चों से मन लगाकर पढऩे की अपील की है। उन्होंने एक्स पोस्ट में बच्चों के लिए संदेश में सीएम साय ने कहा कि प्यारे बच्चों, आज से स्कूल की घंटी फिर से गूंजने लगी है।नई किताबों की खुशबू, नई कक्षा का उत्साह और नए सपनों के साथ फिर से एक नई शुरुआत हो रही है। आज का यह दिन सबके लिए विशेष है। मैं आप सभी से कहना चाहता हूँ कि खूब मन लगाकर पढिय़े, जिज्ञासा के साथ प्रश्न पूछिए, उत्तर खोजिए और आगे बढि़ए। आगे लिखा कि आपकी शिक्षा, आपका उज्ज्वल भविष्य हमारी प्राथमिकता है। हमारी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अब कोई भी विद्यालय शिक्षक विहीन न रहे। हम हर वह प्रयास कर रहे हैं, जिससे शिक्षा का बेहतर वातावरण बने।


