महासमुन्द

पुलिस जांच को हाईटेक बनाने फिंगरप्रिंट प्रशिक्षण कार्यशाला
16-Jun-2026 4:46 PM
पुलिस जांच को हाईटेक बनाने फिंगरप्रिंट प्रशिक्षण कार्यशाला

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद,16जून। अपराध की दुनिया में अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह अनजाने में अपने पीछे कुछ ऐसे निशान छोड़ जाता है जो उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए काफी होते हैं। पुलिस जांच को इसी दिशा में हाईटेक बनाने के लिए सोमवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभागार में एक दिवसीय फिंगरप्रिंट प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए अपराधियों तक पहुंचना और पुलिस की विवेचना को तकनीकी रूप से अभेद्य बनाना है।

कार्यशाला में फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ और उप पुलिस अधीक्षक राकेश नरवरे ने पुलिस कर्मियों को राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली एनएएफआईएस की शक्तियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह एक ऐसा आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है,जिसमें देशभर के अपराधियों के फिंगरप्रिंट का एक विशाल केंद्रीकृत डेटाबेस मौजूद है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी इसकी रफ्तार है। पहले फिंगरप्रिंट मिलान की प्रक्रिया में हफ्तों लग जाते थे, लेकिन अब अपराध स्थल से मिले निशानों को सिस्टम में अपलोड करते ही महज कुछ मिनटों में राष्ट्रीय स्तर के रिकॉर्ड से मिलान हो जाता है। इससे दूसरे राज्यों में छिपे अंतरराज्यीय गिरोहों और शातिर अपराधियों को दबोचना अब आसान हो गया है।

विशेषज्ञों ने चांस प्रिंट अदृश्य या आंशिक फिंगरप्रिंट को सुरक्षित करने की बारीक तकनीकें सिखाईं। नरवरे ने कहा कि जिन मामलों में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं होता या सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होती, वहां फिंगरप्रिंट ही आरोपी को सीधे अपराध स्थल से जोडऩे वाला एकमात्र अचूक जरिया बनता है। चांस प्रिंट को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करना जरूरी है। कार्यशाला में जिले के सभी थाना और चौकियों से आरक्षक से लेकर सहायक उप निरीक्षक स्तर तक के 45 चयनित पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया। अक्सर लापरवाही के कारण महत्वपूर्ण निशान नष्ट हो जाते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए कर्मचारियों को विभिन्न सतहों से फिंगरप्रिंट लिफ्ट करने,उन्हें वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखने और दस्तावेजीकरण करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।


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