महासमुन्द

नए मेडिकल कॉलेजों को मान्यता न मिलने पर पूर्व विधायक ने उठाए सवाल
15-Jun-2026 4:01 PM
नए मेडिकल कॉलेजों को मान्यता न मिलने पर पूर्व विधायक ने उठाए सवाल

महासमुंद, 15 जून। पूर्व संसदीय सचिव व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने प्रदेश में प्रस्तावित पांच नए मेडिकल कॉलेजों को नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) द्वारा मान्यता न दिए जाने पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि दंतेवाड़ा (गीदम), मनेंद्रगढ़, कुनकुरी (जशपुर), जांजगीर-चांपा और कवर्धा में इन कॉलेजों को अनुमति न मिलना प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों की कमी को दर्शाता है।

श्री चंद्राकर ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि इन पांच नए कॉलेजों को मान्यता न मिलने से प्रदेश को मिलने वाली 250 एमबीबीएस सीटों का नुकसान हुआ है, जिससे नीट की तैयारी कर रहे छात्रों को राहत मिल सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना अस्पताल भवन, कॉलेज बिल्डिंग और पर्याप्त फैकल्टी की भर्ती के ही एनएमसी को प्रस्ताव भेज दिया गया, जिसके कारण ये आवेदन खारिज हुए।

अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय महासमुंद मेडिकल कॉलेज को शुरू कराने के लिए एनएमसी के मापदंडों को पूरा करने हेतु लगातार प्रयास किए गए थे। उन्होंने बताया कि उस दौरान एमबीबीएस सत्र की अनुमति के लिए एनाटॉमी विभाग और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं हेतु विधायक निधि से ?25 लाख जारी कर फर्नीचर, डिसेक्शन हॉल, लेक्चर थिएटर, लाइब्रेरी और लैब उपकरणों की व्यवस्था कराई गई थी। साथ ही डॉक्टरों व स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए भी वैकल्पिक प्रयास किए गए थे।

श्री चंद्राकर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में प्रदेश में सीनियर रेजिडेंट के 72 प्रतिशत और असिस्टेंट प्रोफेसर के 56 प्रतिशत पद रिक्त हैं, जबकि 296 डॉक्टर पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मौजूदा चिकित्सा महाविद्यालयों में ही स्टाफ की कमी है और वहां हॉस्टल व मेस जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी नहीं हैं, तो नए कॉलेजों का संचालन कैसे संभव होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि एनएमसी द्वारा कमियां दूर करने के लिए 10 जून तक का समय दिए जाने के बावजूद आवश्यक एफिलिएशन सर्टिफिकेट नहीं भेजा गया।

पूर्व विधायक ने शासन से मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने सरकार से इस विषय पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हुए कहा कि युद्ध स्तर पर कमियों को दूर कर एनएमसी में अपील की जानी चाहिए, ताकि इसी शिक्षा सत्र से इन कॉलेजों को शुरू कराने की दिशा में सार्थक पहल हो सके।


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