महासमुन्द

प्रति एकड़ केवल एक बोरी डीएपी संग महज एक बोरी यूरिया देने के नए नियम का विरोध
03-Jun-2026 6:41 PM
प्रति एकड़ केवल एक बोरी डीएपी संग महज एक बोरी यूरिया देने के नए नियम का विरोध

धान की अच्छी पैदावार और शुरुआती वृद्धि के लिए प्रति एकड़ कम से कम तीन बोरी यूरिया की जरूरत-किसान

 ‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 3 जून।
महासमुंद जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही खाद वितरण के नए नियमों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बेहतर खेती के लिए किसान खाद की मात्रा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। सहकारिता विभाग और जिला प्रशासन ने तैयारियों के दावे तो किए हैं, लेकिन जमीन पर लागू राशनिंग व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। प्रति एकड़ केवल एक बोरी डीएपी और एक बोरी यूरिया देने के नए नियम का किसान विरोध कर रहे हैं। बेमचा-परसूली सोसाइटी के अंतर्गत आने वाले परकोम,परसूली, पंडरीपानी, कारागुला, बनियातोरा, सेनभांठा, बट्टी और अमनपुरी गांवों के सैकड़ों किसान सोमवार से सुबह से शाम तक सोसायटी के चक्कर काट रहे हैं। किसानों का कहना है कि धान की अच्छी पैदावार और शुरुआती वृद्धि के लिए प्रति एकड़ कम से कम तीन बोरी यूरिया की आवश्यकता होती है, जबकि उन्हें केवल एक बोरी दी जा रही है।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तत्काल कोटा बढ़ाकर कम से कम दो बोरी नहीं किया तो फसलें शुरुआती दौर में ही प्रभावित हो जाएंगी। किसानों का कहना है कि सोसायटी से पर्याप्त साद नहीं मिलने पर उन्हें निजी कृषि सेवा केंद्रों से महंगे दामों पर खाद खरीदना पड़ेगा। जिससे होती की लागत बढ़ेगी और आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा। सोसायटी परिसर में मौजूद किसानों ने किस्तों पर आधारित वितरण व्यवस्था खत्म करने की मांग की और कहा है कि सरकार को किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार खाद उपलब्ध कराना चाहिए।  गौरतलब है कि इस वर्ष जिले में 500.00 करोड़ के कृषि ऋण वितरण का लक्ष्य है जो गत वर्ष के 470 करोड़ से अधिक है। अब तक 34 हजार 702 कृषकों को 189.66 करोड़ का लोन नगद और वस्तु खाद-बीज के रूप में बांटा जा चुका है। बीते साल की 414.81 करोड़ की मांग के मुकाबले विभाग ने 77 हजार 811 किसानों से 407.01 करोड़ की वसूली कर ली है। जबकि 4 हजार 467 डिफाल्टर किसानों पर 27.80 करोड़ की देनगी कायम है।
इस बार मध्यम और बड़े किसानों को दो किस्तों में खाद दी जा रही है। इसका सीधा नुकसान यह है कि दूर गांवों से भारी-भरकम भाड़ा देकर ट्रैक्टर-ट्रॉली लाने वाले किसानों को किस्तों में खाद मिलने से परिवहन भाड़ा भी डबल होगा। 5 एकड़ या उससे अधिक रकबा वाले किसानों को अब एक ही काम के लिए दो बार परिवहन खर्च भाड़ा भारी पड़ रहा है।

परसुली समिति प्रबंधक राजेश पटेल के अनुसार पहले दिन 31 टन यूरिया, 10 टन डीएपी और 7 टन पोटाश बांटा गया। वर्तमान वितरण व्यवस्था इस प्रकार तय की गई है कि 1 एकड़ को 1 बोरी डीएपी, 1 बोरी पोटाश, 1 बोरी यूरिया तथा 2 एकड़ वाले को 1 बोरी डीएपी, 1 बोरी पोटाश, 2 बोरी यूरिया दिया जा रहा है। वहीं 3 एकड़ मझोले किसानों को 2 बोरी डीएपी, 1 बोरी पोटाश, 4 बोरी यूरिया तथा 4 एकड़ वाले किसानों को 2 बोरी डीएपी, 1 बोरी पोटाश, 5 बोरी यूरिया और 5 एकड़ से अधिक को खाद का वितरण दो अलग-अलग किस्तों में नियम के तहत खाद दिया जाएगा। नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा ने बताया कि जिले की 16 समितियों के माध्यम से 159 सोसायटियों में खाद की कोई कमी नहीं है। खरीफ  के लिए 24 हजार 225 टन का भंडारण हो चुका है। वर्तमान में समितियों के पास 22 हजार 634 टन का बंपर स्टॉक शेष है।
इसके अलावा 9हजार 927 क्विं. बीज भंडारित कर 446 क्विंटल का वितरण किया जा चुका है।


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