महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 2 जून। शनिवार रात लगभग 8 बजे आए भीषण आंधी-तूफान और बारिश ने बसना क्षेत्र के गढफ़ुलझर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में भारी तबाही मचाई है। तेज हवाओं के कारण सैकड़ों छोटे-बड़े पेड़ धराशायी हो गए। अनेक स्थानों पर विद्युत खंभे टूटकर गिर पड़े और बिजली के तार क्षतिग्रस्त हो गए। इसके चलते क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और ग्रामीणों को लगातार दो रात एवं एक दिन तक अंधेरे और भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों के अनुसार बिजली आपूर्ति ठप होने का सबसे गंभीर असर पेयजल व्यवस्था पर पड़ा। गढफ़ुलझर सहित आसपास के गांवों में नल.जल योजनाएं और निजी बोरवेल पूरी तरह बंद हो गए। जिससे पेयजल और निस्तारी का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया। भीषण गर्मी के बीच पानी की कमी ने ग्रामीणों की परेशानियां कई गुना बढ़ा दीं। हालात ऐसे बन गए कि लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए भी पानी जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। प्राप्त जानकारी के अनुसार पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों ने स्वयं पहल करते हुए आपस में चंदा एकत्र किया और किराए पर डीजल जनरेटर मंगवाया। जनरेटर की सहायता से बोरवेल चलाकर किसी तरह पेयजल की व्यवस्था की गई और दैनिक आवश्यकताओं को पूरा किया गया। ग्रामीणों का कहना था कि यदि बिजली आपूर्ति शीघ्र बहाल नहीं होती तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती थी।
वहीं बिजली बंद होने से संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई। मोबाइल फोन चार्ज करना लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गई। युवाओं ने पंचायत भवन के समीप ट्रैक्टर बैटरी, वाहन अल्टरनेटर और छोटे सोलर पैनलों की मदद से अस्थायी चार्जिंग केंद्र तैयार किया, जहां ग्रामीण अपने मोबाइल फोन चार्ज कर आवश्यक संपर्क बनाए रखने का प्रयास करते रहे। इस सामुदायिक पहल ने संकट की घड़ी में लोगों को काफी राहत पहुंचाई। विद्युत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लगातार क्षतिग्रस्त लाइनों और गिरे हुए खंभों की मरम्मत में जुटे रहे। कल सोमवार की सुबह लगभग 9 बजे क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था बहाल की जा सकी। बिजली लौटते ही पेयजल एवं निस्तारी व्यवस्था भी सामान्य होने लगी, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। ग्राम भगतदेवरी एवं आसपास के ग्रामीण अंचल में भी शनिवार रात आए भीषण तूफान ने भारी तबाही मचाई है। तेज रफ्तार हवा के आगे मकान, पेड़, बिजली खंभे और छोटे-बड़े प्रतिष्ठान टिक नहीं सके। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पिछले 40 वर्षों में उन्होंने ऐसा भयावह तूफान नहीं देखा था। कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके का दृश्य बदल गया। जहां नजर दौड़ाई जाए, वहां उखड़े पेड़, टूटे बिजली खंभे, क्षतिग्रस्त मकान और बिखरे आशियाने नजर आए। आंधी-तूफान का सर्वाधिक प्रभाव भगत देवरी एवं आसपास के गांवों में देखने को मिला। जहां तेज हवा ने मकानों, दुकानों और पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचाया। भगत देवरी से लगे सलडीह,ओडि़शा सीमा के लौड़ीदरहा, डोंगरीपाली और आसपास के गांव भी तूफान की चपेट में रहे। कई स्थानों पर विशाल वृक्ष जड़ से उखड़ गए। जबकि अनेक पेड़ों की बड़ी-बड़ी डालियां टूटकर खेतों और मकानों पर गिरीं। खपरैल वाले मकानों की छज्जा गिर गए, घरों में लगी सीमेंट और लोहे की चादरें हवा के साथ दूर-दूर तक जा गिरीं। तूफान की चपेट में आकर भगत देवरी सहित आसपास के गांवों में 40 से अधिक कच्चे एवं खपरैल मकान क्षतिग्रस्त हो गए। कई कई घरों की दीवारें ढह गईं। अनेक परिवारों के सामने अस्थायी आश्रय की समस्या खड़ी हो गई है। प्राकृतिक आपदा से छोटे व्यापारियों और स्थानीय कारोबारियों को भी भारी नुकसान हुआ है।


