महासमुन्द
हास्य-व्यंग्य ने माहौल को खुशनुमा किया
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,3 जून। महासमुंद दलदली रोड स्थित आशियाना वृद्धाश्रम में एक दिवसीय अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मेरा युवा भारत और समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी में सामाजिक संवेदनशीलता, सहानुभूति और नेतृत्व क्षमता का विकास करना रहा। आमतौर पर युवा केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित रहते हैं, लेकिन इस विशेष कार्यक्रम के जरिए उन्हें समाज की जमीनी हकीकत को करीब से देखने का अवसर मिला।
आयोजन के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए विभागीय अधिकारियों ने बताया कि यह कार्यक्रम युवाओं के लिए महज एक औपचारिक भ्रमण या दौरा नहीं था, बल्कि सीखने की एक जीवंत प्रक्रिया थी। जब युवा स्वयं वृद्धजनों के बीच बैठे, उनकी रोजमर्रा की समस्याओं को समझा और उनके जीवन के अनुभवों को सुना, तो उनमें समाज के प्रति एक गहरी समझ विकसित हुई।
इस तरह के अनुभवात्मक शिक्षण से युवाओं के दृष्टिकोण में व्यापक बदलाव आता है और वे समाज के प्रति अधिक जिम्मेदार नागरिक बनते हैं। कार्यक्रम के दौरान युवाओं को वृद्धाश्रम की संपूर्ण व्यवस्था, कार्यप्रणाली और वहां निवास कर रहे बुजुर्गों की जीवनशैली के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। आश्रम प्रबंधन की ओर से बताया गया कि संस्था किस प्रकार इन बुजुर्गों को एक परिवार जैसा सुरक्षित और आत्मीय माहौल देने का प्रयास करती है। प्रबंधन ने यह भी साझा किया कि जब युवा वर्ग ऐसे स्थानों पर आता है,तो बुजुर्गों को एक नया संबल मिलता है और उनका अकेलापन काफी हद तक दूर हो जाता है।
इस व्यावहारिक शिक्षण कार्यक्रम को पूरी तरह आत्मीय और जीवंत बनाने के लिए मेरा युवा भारत के स्वयंसेवकों ने बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। ऊर्जावान स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम के सुचारू संचालन, बुजुर्गों की बैठक व्यवस्था और सेवा-सत्कार में अपना अमूल्य योगदान दिया।
सभी के सामूहिक प्रयास से यह कार्यक्रम युवाओं को समाज के प्रति अधिक जिम्मेदार व संवेदनशील नागरिक बनाने में बेहद सफल रहा। युवाओं और सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से बुजुर्गों के मनोरंजन के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए।
संगीत सत्र कार्यक्रम में पुराने सदाबहार गीतों की महफिल सजी, जिसे सुनकर बुजुर्ग अपनी सुध-बुध भूल गए। हास्य-व्यंग्य से युवाओं ने हंसी-मजाक और चुटकुलों के जरिए आश्रम के माहौल को खुशनुमा बना दिया। इन गतिविधियों के माध्यम से युवाओं ने बुजुर्गों के चेहरों पर न केवल मुस्कान बिखेरी, बल्कि उनके साथ एक गहरा भावनात्मक रिश्ता भी जोड़ा।


