महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 3 मार्च। महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पैंता में निर्माणाधीन श्रीकृष्ण धाम मंदिर अब वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के कारण गंभीर विवादों में घिर गया है। जानकारी अनुसार मंदिर निर्माण के नाम पर व्यापक स्तर पर दान संग्रह अभियान चलाया गया और समाज के सदस्यों से रसीद काटकर करोड़ों रुपए की राशि एकत्रित की गई और अब यही दान राशि कानूनी जांच और आपराधिक प्रकरण का विषय बन चुकी है।
शिकायत अनुसार 22 सितंबर 2022 से 2 फरवरी 2025 के बीच मंदिर निर्माण हेतु लगभग 4 करोड़ 64 लाख रुपए की राशि समाज के विभिन्न सदस्यों से संग्रहित की गई। आरोप है कि यह संपूर्ण राशि विधिवत बैंक खाते में पूर्ण रूप से जमा नहीं की गई। लगभग 2 करोड़ 77 लाख रुपए के बिल व्हाउचर प्रस्तुत कर व्यय दर्शाया गया। जबकि तकनीकी जांच में निर्माण कार्य का वास्तविक मूल्यांकन लगभग 1 करोड़ 65 लाख रुपए के आसपास पाया गया। व्यय और वास्तविक लागत के बीच यह भारी अंतर निर्माण प्रक्रिया, भुगतान प्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
मामला तब और गंभीर हो गया जब समाज की राष्ट्रीय अध्यक्ष उषा पटेल द्वारा प्रस्तुत शिकायत, गठित जांच समिति की रिपोर्ट तथा विशेष महासभा में पारित प्रस्ताव के आधार पर न्यायालय ने संज्ञान लिया। न्यायालय के आदेश पश्चात पुलिस चौकी भंवरपुर में छह पूर्व पदाधिकारियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318-4 एवं 3-5 के तहत अपराध क्र.0.26 दर्ज किया गया है।
इस प्रकरण में जिन छह पूर्व पदाधिकारियों के विरुद्ध अपराध दर्ज हुआ है, उनमें भुवनेश्वर प्रसाद पटेल पूर्व केन्द्रीय अध्यक्ष श्रीकृष्ण मंदिर निर्माण पैता बसना एवं केन्द्रीय भवन अधरिया सदन रायगढ़ गेसमोती पटेल पूर्व केन्द्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, द्वारिका प्रसाद पटेल पूर्व केन्द्रीय कोषाध्यक्ष, दीनदयाल पटेल पूर्व केन्द्रीय महासचिव, गोपाल नायक पूर्व केन्द्रीय अध्यक्ष बसना, तथा हरप्रसाद चौधरी पूर्व क्रय समिति सचिव शामिल हैं।
जांच में सभी पर सामूहिक रूप से आरोप है कि दान की 4.64 करोड़ रुपए रूप से पूर्ण बैंक जमा नहीं हुआ। 2.77 करोड़ रुपय के बिल प्रस्तुत कर अधिक व्यय दर्शाया गया कि मांग लागत लगभग 1.65 करोड़ रुपए आंकी गई। बिना विधिवत भुगतान किए गए तथा तकनीकी मूल्यांकन और ऑडिट कराए करोड़ों के आय-व्यय का निपटान किया गया।
पुलिस का कहना है कि रसीद पुस्तिकाओं, बैंक खातों, बिल-व्हाउचर, निर्माण सामग्री आपूर्ति और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की गहन जांच, आवश्यकता पडऩे पर तकनीकी विशेषज्ञों से स्वतंत्र मूल्यांकन भी कराया जा सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए समाज के सदस्यों में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की अपेक्षा है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष उषा पटेल ने स्पष्ट किया है कि समाज की आस्था और धन की रक्षा सर्वोपरि है तथा दोष सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस बहुचर्चित प्रकरण में और तथ्य सामने आने की संभावना है।
इनका आरोप है कि बिना प्रस्ताव पारित किए भुगतान किया गया है। ठेका प्रणाली से कार्य होने के बावजूद मजदूरों की कथित फर्जी उपस्थिति दर्शाकर 3 लाख 43 हजार 400 रुपए का भुगतान, जेसीबी, हाईड्रा, ट्रैक्टर जैसी मशीनरी के नाम पर संदिग्ध बिल प्रस्तुत करने तथा अनिवार्य ऑडिट रिपोर्ट 15 अप्रैल के भीतर राशि जमा करने का प्रस्ताव पारित किया गया किंतु प्रस्ताव का पालन न होने, निर्णय को अस्वीकार करने और सभा में विवाद की स्थिति उत्पन्न होने के बाद अंतत: कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया गया। अब पूरा मामला न्यायालय और पुलिस जांच के दायरे में है और समाज की निगाहें आगामी जांच एवं विधिक प्रक्रिया पर टिकी हुई।


