महासमुन्द

स्वामी आत्मानंद स्कूलों को सुविधाएं-संसाधन उपलब्ध नहीं कराना सरकार की दुर्भावना-विनोद चंद्राकर
17-Feb-2026 3:06 PM
स्वामी आत्मानंद स्कूलों को सुविधाएं-संसाधन उपलब्ध नहीं कराना सरकार की दुर्भावना-विनोद चंद्राकर

महासमुंद,17 फरवरी। पूर्व संसदीय सचिव व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने भाजपा की साय सरकार पर दुर्भावना पूर्वक कार्य करते हुए आत्मानंद स्कूल के संसाधनों व सुविधाओं में कटौती का आरोप लगाया है।  श्री चंद्राकर ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा शुरू किए गए स्वामी आत्मानंद स्कूलों का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ में आर्थिक रूप से कमजोर और मेधावी छात्रों को बिना किसी खर्च के निजी स्कूलों जैसी उच्च गुणवत्तापूर्णए आधुनिक अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा प्रदान करना था। पूर्व सीएम श्री बघेल की मंशा थी कि इस योजना के माध्यम से गरीब परिवारों के बच्चों को समान अवसर देकर, उन्हें बेहतर भविष्य के लिए तैयार किया जा सके। जिसके परिणाम स्वरूप पूरे प्रदेश में स्वामी आत्मानंद स्कूलों के बच्चों ने टॉप 10 में स्थान बनाया था। लेकिन जैसे ही प्रदेश में भाजपा की सरकार आयी, शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। पिछले 2 साल के कार्यकाल में भाजपा ने स्वामी आत्मानंद स्कूलों को बदहाल कर दिया।

       श्री चंद्राकर ने कहा कि इन स्कूलों में आज स्थिति ऐसी है कि न पर्याप्त फंड उपलब्ध कराया जा रहा है और न योग्य शिक्षक नियुक्त किए जा रहे हैं। इसके अलावा बुनियादी संसाधन कुर्सी, टेबल, लैब सामग्रीए ड्रेस भी समय पर नहीं मिल पा रहे हैं। पहले प्रति स्कूल 5 से 6 लाख रुपए फंड जारी हुआ करता था। उसे घटाकर अब 2 लाख रुपए से भी कम कर दिया गया है। यह भाजपा सरकार की दुर्भावना का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। युक्तियुक्तकरण के नाम पर सरकार ने सरकारी स्कूलों की मूलभूत ढांचे को बिगाडक़र उनके अस्तित्व को खतरे में डालने का काम किया है।

       पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद तत्कालीन मंत्री व वर्तमान सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने 33 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी। वह घोषणा कागजों तक सीमट कर रह गई है। भाजपा की सरकार ने प्रदेश में ना ही शिक्षकों की भर्ती की और ना ही स्कूलों को अपडेट किया। उल्टे पहले से बेहतर व व्यवस्थित रूप से संचालित शासकीय स्कूलों का सेटअप बिगाडऩे का काम किया। जिससे प्रदेश में शिक्षा का स्तर काफी नीचे चला गया है। शिक्षा के स्तर नीचे गिरने का स्पष्ट उदाहरण 2024.25 शिक्षण सत्र है। जिसमें महासमुंद जिले से 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा में एक भी छात्र टॉप.10 में नहीं पहुंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंच पाए थे। जबकि कांग्रेस शासन काल के समय उपलब्ध संसाधनों व सुविधाओं के बल पर शिक्षा सत्र 2023-24 में जिले के बच्चों ने टॉप-10 में स्थान बनाया था।


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