महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 30 जनवरी। आम आदमी पार्टी ने प्रदेश में किसानों के साथ हो रहे अन्याय के विरोध में स्थानीय लोहिया चौक में 29 जनवरी को धरना प्रदर्शन कर रैली निकाल कर कलेक्टर परिसर का घेराव किया। कार्यकर्ताओं एवं किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम से ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा।
प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेन्द्र चन्द्राकर ने धरना पर किसानों और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार छत्तीसगढ़ के अन्नदाता के खिलाफ एक के बाद एक नए नए षड्यंत्र कर आत्महत्या के लिए मजबूर कर रही है। सरकार ने घोषणा की थी कि धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू की जायेगी। लेकिन सबको पता हैं कि सरकार ने लेट कर धान खरीदी कहीं पर 17 तारीख कहीं पर 18 तारीख और कई जगह तो 25 नवम्बर से खरीदी चालू की। और अब धान खरीदी 29 जनवरी को बंद कर रहे हैं। जबकि सरकार ने 31 जनवरी तक धान खरीदने की बात कही थी,जो की अपनी बात से ही मुकर रही है। कहा कि सरकार है कि साजिश के तहत लाखों छोटे किसानों का जबरदस्ती रकबा समर्पण करवा रही है। वहीं कुछ किसानों को आज तक टोकेन नहीं मिला है ना ऑनलाइन, ना ऑफलाइन। जो छोटे किसान थे उन्हें 1 टोकन, जो मीडियम किसान थे उन्हें 2 टोकन और बड़े किसानों को 3 टोकन दिया गया। बावजूद इसके आज भी किसान अपनी पूरी धान नहीं बेच पा रहे हैं। ॅॅॅॅ उन्होंने कहा कि अब तक छत्तीसगढ़ में लगभग 15 प्रतिशत किसान धान बेचने से वंचित रह चुके हैं और जिन किसानों ने कर्ज लिया है, उन्हें कर्ज चुकाने की चिंता है। इसलिए अब प्रदेश के किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। इसके पूरे तौर पर जिम्मेदार विष्णु देव सरकार है। जिलाध्यक्ष राकेश झाबक ने कहा कि प्रदेश के मंत्रिमंडल में हर मंत्री किसान परिवार से है फिर भी किसानों की अनदेखी की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी किसान हंै लेकिन किसानों के लिए सशक्त आवाज नहीं उठा रहे हैं। कांग्रेस भी सवालों के घेरे में है। किसानों की हितैषी बात करने वाली सरकार धान खरीदी में पूरी तरह फेल हो चुकी है। सरकारी समितियों में भ्रष्टाचारी सिस्टम लाखों क्विंटल धान को चूहों द्वारा खा लिया ऐसा कहकर जनता के पैसे का भ्रष्टाचार कर रहे हैं ।
और ये सरकार उसे रोकने में पूरी तरह नाकाम ही है।
प्रदेश सचिव संजय यादव ने कहा कि किसान इस वक्त संक्रमण काल से गुजर रहे हैं। किसानों को सरकारी कर्ज अदा करने और परिवार के भरण पोषण की चिंता है। किसानी के बल पर ही उनके परिवार के बच्चों की पढ़ाई और दवाईयों का खर्च टिका हुआ है। दुनिया के 20 देशों में छत्तीसगढ़ का चावल सप्लाई होता है जिससे राज्य सरकार को वृहद राजस्व की प्राप्ति होती है। किसानों के धान खरीदने से पहले सरकार का दावा होता है कि किसानों का एक-एक दाना अनाज खरीदेंगे। सरकार की बातों में आकर किसान कर्ज लेकर धान बोता है और उनकी भरपूर फसल देखकर सरकार की हवाईयां उडऩे लगती है। वह किसानों को धान बेचने से सीधे तौर पर मना नहीं कर सकती। इसलिए कई तरह के रोड़े अटकाकर उन्हें धान बेचने से वंचित कर देती है। इस साल अभी लाखों किसानों ने धान नहीं बेचा है और सरकारी तारीख खत्म हो चुकी है। ऐसे में राज्य सरकार से मांग है कि धान खरीदी की तारीख बढ़ाए और अपने वादे के मुताबिक किसानों का एक-एक दाना खरीदे। कार्यक्रम में जिले भर के सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता धरना प्रदर्शन में शामिल हुए।


