महासमुन्द

आधुनिक संसाधनों के साथ 14 प्रशिक्षित अफसरों की तैनाती के साथ महासमुंद में साइबर थाना शुरू
29-Jan-2026 3:49 PM
आधुनिक संसाधनों के साथ 14 प्रशिक्षित अफसरों की तैनाती के साथ महासमुंद में साइबर थाना शुरू

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 29 जनवरी। डिजिटल अपराधों पर लगाम लगाने और नागरिकों की साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बुधवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने वर्चुअल माध्यम से प्रदेश के 8 जिलों महासमुंद, बलौदाबाजार, कोरबा, रायगढ़, धमतरी, जांजगीर-चांपा,जशपुर और राजनांदगांव में नवनिर्मित साइबर थानों का शुभारंभ किया।

इसके साथ ही महासमुंद के डिजिटल सुरक्षा कवच में नया अध्याय जुड़ गया है। अब जिले में साइबर थाना सिर्फ  एक सरकारी दफ्तर नहीं, बल्कि ऑनलाइन ठगों के खिलाफ  डिजिटल वॉर रुम की तरह काम करेगा। अब तक साइबर अपराधों के लिए लोगों को सामान्य थाने के चक्कर काटने पड़ते थे जिसमें पुलिस अक्सर तकनीकी पेचीदगियों में उलझ जाती थी। नया थाना खुलने से अब साइबर ठगी के शिकार लोगों को सुविधाएं मिलेगी। इससे पहले रायपुर रोड स्थित कोतवाली के पास साइबर सेल संचालित हो रहा था।

 

महासमुंद साइबर थाना में 14 नए स्टाफ  होंगे, जिनकी पदस्थापना कर दी गई है। ये सभी जवान साइबर का कोर्स किए हुए हैं। समय-समय पर साइबर एक्सर्ट के द्वारा भी साइबर ठगी के केस को आसान तरीके से सुलझाने के तरीके बताने पहुंचेंगे। खास बात यह है कि साइबर थाना खुलने से साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट जैसे मामले में तत्काल एफआईआर हो जाएगी।

महासमुंद साइबर थाने के उद्घाटन अवसर पर कलेक्टर विनय लंगेह और पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कहा जा रहा है कि साइबर थानों के अस्तित्व में आने से अब तकनीकी अपराधों की विवेचना व अपराधियों की धरपकड़ में तेजी आएगी। साइबर थाना महासमुंद में प्रशिक्षित अधिकारियों और आधुनिक संसाधनों की तैनाती की गई है। महासमुंद एसपी प्रभात कुमार ने कहा कि किसी भी संदिग्ध डिजिटल गतिविधि या ऑनलाइन ठगी का शिकार होने पर नागरिक घबराएं नहीं। बल्कि तत्काल साइबर थाना या हेल्पलाइन नंबर 1930 का सहारा लें।

गौरतलब है कि जिले में ग्रामीण आबादी ज्यादा है। यह थाना सिर्फ  शहर के लिए नहीं, बल्कि गांव के उन किसानों और बुजुर्गों के लिए एक मददगार दोस्त बनेगा। जो लोग डिजिटल दुनिया में नए हैं और अक्सर ओटीपी के जाल में फंस जाते हैं। उनके लिए अब मोबाइल और लैपटॉप की जांच के लिए बाहर के बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी। थाने में ही आधुनिक टूल होंगे जो डेटा को रिकवर करने व डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रेस करेंगे।


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