महासमुन्द
महासमुंद, 29 जनवरी। झूठे मामले में फं साकर जेल भेजने और विद्वेषपूर्ण कार्रवाई के विरूद्ध प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी चेतना ठाकुर ने प्रार्थी पूर्व पार्षद व आरटीआई कार्यकर्ता पंकज साहू को 2 लाख रुपए क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने का आदेश दिया है।
मालूम हो कि श्री साहू का परिवार 6 दिन जेल में रहा। साल 2019 में सभी को न्यायालय ने दोषमुक्त किया था। दोषमुक्ति के बाद श्री साहू ने 2022 में विद्वेषपूर्ण अभियोजन व झूठी रिपोर्ट पर जेल भेजने के लिए 2 लाख रुपए क्षतिपूर्ति का वाद दायर किया था। जिस पर यह फैसला आया है। मामला यह है कि वर्ष 2010 से 2015 के बीच पार्षद रहते हुए श्री साहू ने महासमुंद नपा में भ्रष्टाचार के विरूद्ध आवाज उठाई थी। श्री साहू ने बताया कि प्रकरण थाने में दर्ज कराया था। जिससे गुस्सा होकर नपा पदाधिकारी व सीएमओ हेमशंकर देशलहरा व कुछ नपा कर्मियों ने कचहरी चौक पर श्री साहू की होटल में तोडफ़ ोड़ की थी। इस दौरान श्री साहू का हाथ फ्रेक्चर हुआ था और श्री साहू ने भी संबंधितों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराई थी।
इसी दौरान सीएमओ देशलहरा, उनकी पत्नी चमेली, नपा पदाधिकारी व कुछ कर्मियों ने थाने में हंगामा खड़ा कर पंकज साहू, उसके पिता, भाई आदि के विरूद्ध सीएमओ आवास में तोडफ़ोड़, मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई और श्री साहू को 6 दिन जेल में रहना पड़ा। साल 2019 में न्यायालय ने सभी को दोषमुक्त कर दिया। दोषमुक्ति के बाद पंकज साहू ने गृह विभाग व पुलिस महानिरीक्षक से शिकायत की। तत्कालीन टीआई प्रमिला मंडावी के विरूद्ध विभागीय जांच हुई। श्री साहू ने बताया कि प्रमिला मंडावी को विभागीय दंड दिया गया। पश्चात 2022 में 2 लाख रुपए क्षतिपूर्ति का वाद श्री साहू ने दायर किया। इसमें न्यायालय ने आदेश दिया है कि चमेली देशलहरा और टीआई प्रमिला मंडावी संयुक्त रूप से 2 लाख रुपए क्षतिपूर्ति राशि प्रार्थी पंकज साहू को प्रदान करें। वाद हेतु न्याय शुल्क के रूप में जमा 23800 रुपए भी प्रार्थी को वापस मिलेगा।


