महासमुन्द

लिमगांव स्कूल प्रकरण: जांच में राजनीतिक दबाव का आरोप
27-Jan-2026 3:37 PM
लिमगांव स्कूल प्रकरण:  जांच में  राजनीतिक दबाव का आरोप

स्वतंत्र जांच दल की मांग की

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 27 जनवरी। महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्च प्राथमिक शाला लिमगांव में फर्जी उपस्थिति से जुड़ी शिकायत के मामले में जांच प्रक्रिया को लेकर प्रश्न उठे हैं। जांच में लगे अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव का आरोप लगाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद को पत्र लिखकर जिला स्तरीय स्वतंत्र जांच दल गठित करने की मांग की है।

ताजा जानकारी के अनुसार, जांच दल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में निष्पक्ष जांच कर पाना कठिन हो रहा है। इस संबंध में 22 जनवरी को संयुक्त रूप से पत्र भेजा गया है। हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी विजय लहरे ने इस मांग को स्वीकार नहीं करते हुए 23 जनवरी को जांच प्रतिवेदन तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं।

 शिकायतकर्ता के आरोप

इस प्रकरण में शिकायतकर्ता विनोद कुमार दास ने 18 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री सचिवालय, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिवों तथा जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विद्यालय के प्रधानपाठक धनीराम चौधरी स्वास्थ्य कारणों से लंबे समय तक विद्यालय में उपस्थित नहीं थे, इसके बावजूद उपस्थिति पंजी में उनके हस्ताक्षर दर्ज होते रहे।

शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि एक बाहरी व्यक्ति से मानदेय पर अध्यापन कराया गया, जो नियमों के अनुरूप नहीं है।

जांच की प्रक्रिया

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 3 नवंबर 2025 को चार सदस्यीय जांच दल गठित कर जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच दल ने 11 दिसंबर को विद्यालय पहुंचकर शिक्षकों के बयान दर्ज किए। इसके बाद 12 दिसंबर को तत्कालीन बीईओ सरायपाली और दो सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के बयान लिए गए।

 

जांचकर्ताओं का पत्र

जांच दल में शामिल बद्रीविशाल जोल्हे (प्रभारी बीईओ बसना), लोकेश्वर सिंह कंवर (एबीईओ बसना), अनिल सिंह साव (प्रभारी बीआरसीसी बसना) और क्षीरोद्र पुरोहित (प्राचार्य, आत्मानंद स्कूल बसना) द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जांच के दौरान राजनीतिक व्यक्तियों द्वारा फोन के माध्यम से दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है।

पत्र में दबाव बनाने वालों के नामों का उल्लेख नहीं किया गया है।

शिकायतकर्ता का पक्ष

शिकायतकर्ता विनोद दास का कहना है कि मीडिया में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का नाम आने से मामला संवेदनशील हो गया है। उनके अनुसार इस कारण जांच दल दबाव महसूस कर रहा है। उन्होंने मांग की है कि जांच प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से की जाए।

 


अन्य पोस्ट