महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 22 नवंबर। अपरान्ह एक प्रेस वार्ता लेकर नपााध्यक्ष प्रकाश चंद्राकर ने कहा कि स्व. भागवत कोसरिया ऑडिटोरियम को लेकर समाज विशेष का अपमान बताकर विपक्ष भ्रम फैलाने का काम कर रही है।
इस ऑडिटोरियम के लिए पूरे पीआईसी और परिषद ने वर्ष 2020-21 में अधोसंरचना मद से डेढ़ करोड़ और इसके अलावा शासकीय भूमि नहीं होने की स्थिति में निजी भूमि की सहमति सहित वाली तमाम प्रक्रिया पूरी कर शासन को भेजा गया था। लेकिन विधायक के दबाव के बाद शासन ने एक साल बाद उसी ऑडिटोरियम की लागत डेढ़ करोड़ से घटाकर एक करोड़ कर दिया। उसमें से 50 लाख रुपये विधायक विनोद चंद्राकर ने अनुशंसित कार्यों के लिए दे दिया।
समाज प्रमुखों की मांग पर ही सारी प्रक्रिया अपनाई गई है। इस परिषद को सभी समाज की चिंता है और पूरी इमानदारी से काम जारी है। यह काम विपक्ष को हजम नहीं हो रही है। अगर बयानबाजी के अलावा लोक हित में कुछ काम करना चाहते हैं, तो अपने विधायक से पूछे कि सरकार की दी हुई ऑडिटोरियम की डेढ़ करोड़ रुपए में से 50 लाख रुपये कहां है?
नगर पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्राकर ने पत्रकारवार्ता में कहा कि वर्ष 2020-21 और 2021-22 के दौरान शासन से अधोसंरचना मद का एक रुपये भी नहीं मिला। इसके बावजूद भी वर्ष 2020-21 में समाज प्रमुख स्व. अलख चतुर्वेदी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सेवनलाल चंद्राकर और दाऊलाल चंद्राकर के अनुरोध पर शासकीय भूमि नहीं होने के बाद भी भूमि स्वामी दिलीप कौशिक से जमीन की मांग की।
दिलीप कौशिक ने अपनी लगानी जमीन पर ऑडिटोरियम निर्माण के लिए लिखित सहमति दे दी। इसके बाद अधोसंरचना मद से डेढ़ करोढ़ का पीआईसी और परिषद प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। जिसकी स्वीकृति शासन द्वारा दे दी। इसके ठीक एक साल बाद शासन ने उसी ऑडिटोरियम का 50 लाख घटाकर एक करोड़ का प्रस्ताव मंगाया है।
इस मामले में प्रकाश चंद्राकर का कहना है कि स्थानीय विधायक ने अपने किए घोषणा के उपयोगिता के लिए ही 50 लाख का डाका डाला है। जबकि विधायक को अपनी घोषणा के लिए शासन से अलग राशि की मांग करनी चाहिए। पिछले दो सालों से अधोसंरचना मद की राशि नहीं मिली है। विधायक व विपक्ष उलटे पालिका और अध्यक्ष पर समाज विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं। पालिका अध्यक्ष ने कहा कि पूरा परिषद स्व.भागवत कोसरिया ऑडिटोरियम निर्माण के लिए संकल्पित है।


