महासमुन्द
लोकेशन नहीं मिलने से हो रही जनहानि को लेकर वन विभाग चितिंत
महासमुंद में चंदा हथिनी एमई-4 को 22 सितंबर 2018 को रेडियो कॉलर पहनाया गया था
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 15 सितंबर। महासमुंद जिले में हाथियों के हमले से इस साल 7 लोगों की मौत के बाद अब दंतैल का लोकेशन नहीं मिलने और इसके चलते हो रही जनहानि से परेशान वन विभाग जल्द ही एमई-1 टस्कर को रेडियो कॉलर पहनाने की तैयारी में है। हालांकि इसमें थोड़ा वक्त लगेगा। अगले महीने अक्टूबर में एमई-1 को रेडियो कॉलर पहनाने का अभियान शुरू किया जाएगा। वर्तमान में महासमुंद जिले में बार दल के दो टस्कर मौजूद हैं। वैसे बीच-बीच में रोहांसी दल के हाथी भी महामसुंद के सिरपुर क्षेत्र में आते रहे हैं। हाथी को रेडियो कॉलर पहनाने से पहले कई तरह की तैयारियां की जाती हैं, जो विभागीय स्तर पर शुरू कर दी गई है।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रेडियो कॉलर लगाने की शुरुआत 12 मई 2018 को सरगुजा रेंज से की गई। बहरादेव नामक नर हाथी को पहला रेडियो कॉलर पहनाया गया था। 15 जून 2018 को इसी रेंज के मैनपाट क्षेत्र में 9 हाथियों के दल में से एक मादा हाथी को रेडियो कॉलर पहनाया गया था। महासमुंद में चंदा हथिनी एमई 4 को 22 सितंबर 2018 को रेडियो कॉलर पहनाया गया था। अब तक छत्तीसगढ़ में आठ जंगली हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाया गया है। इनमें से कई हाथियों के रेडियो कॉलर या तो गिर गए हैं या फिर खराब हो गए हैं।
मालूम हो कि दो दिन पहले ही रविवार की रात को एमई-1 टस्कर ने गौरखेड़ा के पास महासमुंद निवासी राजू विश्वकर्मा और झालखम्हरिया में परमेश्वर कमार नामक व्यक्ति को मारा था। महासमुंद जिले में ऐसा पहली बार हुआ है, जब एक ही दिन में हाथी के कुचलने से दो लोगों की मौत हुई है। हाथियों का सही लोकेशन नहीं मिलना ही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। रात में हाथियों के मूवमेंट की कोई खास जानकारी नहीं मिल पाती। एमई-1 टस्कर का लोकेशन दोपहर तक मोहंदी के जंगल में देखा गया था, लेकिन वह कब गौरखेड़ा पहुंचा, किसी को खबर तक नहीं लगी। यहां जनहानि के दो घंटे बाद ही एमई.1 झालखम्हरिया पहुंच चुका था। वहां भी एक युवक की मौत के बाद दंतैल के आने की खबर मिली।
यहां बताना जरूरी है कि साल 2018 में 22 सितंबर को उस समय जिले में विचरण करने वाले बार दल में से चंदा हथिनी को रेडियो कॉलर पहनाया गया था। वन विभाग की टीम ने वाइल्ड लाइफ एसओएस के साथ मिलकर चंदा हथिनी को पांच घंटे में रेडियो कॉलर पहनाया था। उसी दौरान ही बार दल के 3 दंतैल को भी रेडियो कॉलर पहनाया जाना था लेकिन किन्हीं कारणों से ऐसा नहीं हो पाया था। साल 2020 में चंदा हाथिनी बार दल के साथ गरियाबंद होते हुए धमतरी चली गई थी। अब यह दल धमतरी, कांकेर, गरियाबंद में घूम रहा है।
डीएफ ओ पंकज राजपूत ने बताया कि एमई.1 टस्कर को रेडियो कॉलर पहनाने के लिए इस साल की शुरुआत में तैयारी की जा चुकी थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण ये काम प्रभावित हुआ।


