महासमुन्द

जिले में शांति से गणेश की पूजा अर्चना, चौक चौराहों, गली-मुहल्लों में शोर-शराबा गायब
11-Sep-2021 10:26 PM
जिले में शांति से गणेश की पूजा अर्चना, चौक चौराहों, गली-मुहल्लों में शोर-शराबा गायब

बिना अनुमति शहर में दो से तीन जगह लगे पंडाल, सार्वजनिक गणेशोत्सव के लिए अनुमति लेना जरूरी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता 
महासमुंद, 11 सितम्बर।
महासमुंद मुख्यालय सहित जिले में शांति से भगवान गणेश की पूजा अर्चना जारी है। चौक चौराहों, गली-मुहल्लों में भी डीजे की आवाज गायब है। कहीं भी भीड़ जैैसी स्थिति निर्मित नहीं है। गणेशोत्सव के पहले दिन कल भक्तों ने मूर्तिकारों व शहर में विभिन्न जगहों पर लगे स्टॉलों से गणपति की प्रतिमाएं खरीदी और घर ले गए। कोरोना के कारण लागू नियमों के कारण ऐसा दूसरी बार हुआ जब गणेश जी की स्थापना बगैर शोर-शराबे के सादगीपूर्ण तरीके से हुईं। शहर में लगे स्टॉलों में इस बार भी करीब चार फीट की मूर्ति ही बिकी। लिहाजा घर और सार्वजनिक पूजा पंडालों में 4 फीट तक की मूर्तियों की स्थापना हुई है। शहर में एक दो जगहों पर ही सार्वजनिक पंडाल पर गणपति को विराजित किया गया है, लेकिन अनुमति नहीं है। इसकी पुष्टि एसडीएम दफ्तर से हुई है।

मूर्तिकार राजेश चक्रधरी के मुताबिक कोरोना संक्रमण के चलते प्रशासन ने गाइडलाइन देरी से जारी की थी। मूर्ति बनाने का काम दो महीने पूर्व से ही शुरू हो जाता है। तीसरी लहर को देखते हुए इस बार मूर्तिकारों ने पहले से ही 4 फीट की ही मूर्तियों का निर्माण किया है। पिछले वर्ष भी कोरोना संक्रमण के चलते 4 फीट ऊंचाई की मूर्ति ही स्थापित की गई थी। उन्होंने बताया कि शहर में बिक्री के लिए करीब 5 से 10 हजार की मूर्ति का निर्माण मूर्तिकारों ने किया था। 

साउंड सिस्टम एवं लाइट एसोसिएशन व टेंट व्यापारी अभी भी कोरोना के कारण पैदा हुई परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। संक्रमण के चलते इस साल भी प्रशासन ने गाइडलाइन जारी किया है। जारी गाइडलाइन के चलते इस बार भी एक दो को छोडक़र सार्वजनिक स्थलों पर मूर्ति विराजित नहीं की गई है। सार्वजनिक स्थलों में मूर्ति विराजित नहीं होने के कारण टेंट, लाइट व साउंड सिस्टम, डीजे वाले निराश हैं। सालभर का व्यापार इस बार भी खाली जा रहा है।

 


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