महासमुन्द

एनएमसी की टीम ने बंद लिफाफे में केंद्र को भेज दी जानकारी
25-Aug-2021 8:06 PM
एनएमसी की टीम ने बंद लिफाफे में केंद्र को भेज दी जानकारी

महासमुंद मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण हुआ पूरा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 25 अगस्त।
महामसुंद में खुलने वाले नए मेडिकल कॉलेज का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। मेडिकल काउंसिल के नॉम्र्स के अनुसार महासमुंद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बेड की संख्या 330 है। कॉलेज के लिए स्थापित दो लेक्चर हॉल में 100-100 स्टूडेंट्स की क्षमता है। लैब की पर्याप्त संख्या, मेस और छात्रावास भी बेहतर है। हालांकि कॉलेज अस्पताल का ओटी अभी बंद है और आपातकालीन चिकित्सा के लिए आवश्यक सुविधाओं में भी कमी है, जो भविष्य में दूर की जा सकती है।

मेडिकल कॉलेज के लिए प्रोफेसर्स, एसोसिएट प्रोफेसर्स और असिस्टेंट प्रोफेसर्स सहित बांडेड पीजी डॉक्टर की कमी को लेकर मेडिकल कॉलेज की टीम ने पूरी तैयारी की और अंतिम समय में नियमानुसार 50 डॉक्टर के ज्वाइनिंग की सूची भी एनएमसी को सौंप दी है।  दो दिन के निरीक्षण के बाद एनएमसी की टीम ने अपनी रिपोर्ट बनाकर मेडिकल काउंसिल नई दिल्ली को मेल के जरिए और बंद लिफाफे में भेज दी है। 

मालूम हो कि महासमुंद में खुलने वाले नए मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के लिए एनएमसी (नेशनल मेडिकल काउंसिल) की तीन सदस्यीय टीम सोमवार को महासमुंद पहुंची थीं। टीम कर्नाटक के डॉ. गुरुदत्ता के नेतृत्व में आई थी। उनके साथ डॉ. शैलेष एम पटेल गुजरात और डॉ. शैलेष गोयल दिल्ली शामिल थे। तीनों सदस्यों ने यहां दो दिनों तक मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कॉलेज भवन और यहां उपलब्ध सुविधाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। मेडिकल कॉलेज के लिए नियुक्त किए गए प्रोफेसर्स, चिकित्सकों और स्टॉफ की काउंटिंग की। मंगलवार को ही रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई के लिए अग्रेषित कर दिया।

सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि यहां 330 बेड न्यूनमत बेड की संख्या की मांग पर 330 बेड उपलब्ध हैं। टीम ने इसे सराहा भी। इस मामले में डीन डॉ. पीके निगम ने कहा कि ये गौरव की बात है कि टीम ने भी माना है कि हमारे पास 330 बेड उपलब्ध है। सवाल उठ रहे थे कि अस्पताल में कैसे 330 बेड हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो भी कमियां पाई जाती हैं, उसमें लगातार सुधार होता रहेगा।

 मंगलवार को सांसद चुन्नीलाल साहू ने एनएमसी टीम के संयोजक कर्नाटक से पहुंचे डॉ. गुरुदत्ता, डॉ. शैलेष एम पटेल गुजरात, डॉ. शैलेष गोयल दिल्ली से मुलाकात की। उन्होंने टीम से आग्रह किया कि छोटी-मोटी कमियों को नजर अंदाज करते हुए मेडिकल कॉलेज खोलने का मार्ग प्रशस्त करें। केंद्रीय स्तर पर कोई दिक्कत हो तो सीधे उनसे संपर्क कर अवगत कराएं, ताकि सांसद खुद ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से प्रकिया पूरी करा सकें। सांसद ने कहा कि नेशनल मेडिकल काउंसिल के कठोर मापदंड को नए मेडिकल कॉलेज में एकाएक पूरा कर पाना कठिन होता है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बहुत जल्दी मेडिकल कॉलेज में स्टूडेंट्स को प्रवेश मिल पाएगा।

जानकारी अनुसार मेडिकल कॉलेज में जो सबसे बड़ी कमी रही वो प्रोफेसर्स की है। हालांकि स्वास्थ्य संचालनालय ने पहले ही मेडिकल कॉलेज के लिए आवश्यक चिकित्सक, प्रोफेसर्स, पीजी रेसीडेंट सहित अन्य प्राध्यापकों की नियुक्ति कर दी थी। लेकिन अवकाश और अन्य कारणों से कई ज्वानिंग नहीं दे पाए। मंगलवार तक अधिकांश ने ज्वाइनिंग कर ली थी। मेडिकल कॉलेज में कुल 55 की संख्या में प्रोफेसर्स, एसोसिएट प्रोफेसर्स, असिस्टेंड प्रोफेसर्स, सीनियर रेसीडेंट और पीजी बांडेड डॉक्टर होने चाहिए। इनमें से 50 की ज्वाइनिंग हो चुकी है। मेडिकल कॉलेज में क्लासेस के लिए जीएनएम परिसर को चुना गया है। तैयारी हो चुकी है। मेडिकल कालेज में दो अलग-अलग लेक्चर हॉल बनाए गए हैं। क्षमता 100-100 स्टूडेंट्स की है। ये भी नॉम्र्स के अनुसार है, लेकिन एनएमसी की टीम का मानना था कि हॉल छोटा है। दो स्टूडेंट्स के बीच जितना गैप होना चाहिए वो नहीं है। मेडिकल कॉलेज के अनुरूप हॉस्पिटल बिल्डिंग के कमरे काफ ी छोटे हैं। टीम का कहना था कि कमरे 200 फीट के होने चाहिए लेकिन हमारे अस्पताल के कमरे 100 फ ीट तक के हैं। हालांकि टीम ने कहा कि शुरुआती दौर के हिसाब से इसे कंसीडर किया जा सकता है। यहां आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं में कमी है। सोनोग्राफ ी मशीन रात के लिए नहीं होना, सहित अन्य कमियां टीम ने गिनाई और कहा कि ये भविष्य में दूर की जा सकती हैं। एनएमसी की टीम को अस्पताल की ओटी बंद मिली है। यहां ऑपरेशन बंद है और सीपेज भी है। हालांकि मौजूद अधिकारियों ने बताया कि ओटी का कल्चर सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आते ही इसे शुरू कर लिया जाएगा।
 


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