महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 24 अगस्त। आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग यूनिक आईडी एचयूआईडी नियम के विरोध में सोमवार को जिले के सराफा कारोबारियों ने एक दिन दुकान बंद रखी। वे नियमों को मनमाने ढंग से पालन करवाने का विरोध कर रहे हैं। इसे कारोबारियों ने भी समर्थन दिया है। महासमुंद सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हेमंत मालू ने कहा है कि सराफा एसोसिएशन कि एचयूआईडी नियम के विरोध में जिले की सभी दुकानें बंद है। इसके चलते 1 दिन में लगभग 2 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ।
उन्होंने बताया कि प्रदेशस्तर के पदाधिकारियों के निर्देशन में दुकानें बंद रखी और उनके द्वारा मांगों को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय मानक ब्यूरो प्रमुख प्रमोद तिवारी को ज्ञापन भेजा गया है। हॉल मार्किंग की अनिवार्यता लेने के लिए व्यापारियों को एचयूआईडी लेना अनिवार्य है, लेकिन इसकी जटिल प्रक्रियाओं के कारण सराफा कारोबारी काफी परेशान हैं। यह नए नियम पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।
यूनिक आईडी नियम को लेकर उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़ी आबादी तो गांव में रहती है। नियम के मुताबिक पूरा स्टॉक मानक ब्यूरो की वेबसाइट पर अपलोड करना है। एक-एक प्रोडक्ट की डिटेलिंग होगी, सभी का नंबर जारी होगा। अब ग्रामीण सराफा व्यापारी पोर्टल या सॉफ्टवेयर कैसे ऑपरेट करेगा? छग में करीब 5500 व जिले में 150 कारोबारी हैं।
गौरतलब है कि देश के सभी नागरिकों की पहचान आधार कार्ड में आईडी के जरिए की गई है, ठीक उसी तरह सरकार ने इसे ज्वेलरी के हर नग की विशिष्ट पहचान यूआईडी अनिवार्य कर दिया है। इस आईडी में बेचने वाले ज्वेलर्स का कोड और ज्वेलरी की पहचान दर्ज होगी। पुलिस या फिर कोई व्यक्ति जैसे ही बीआईएस की ओर से बनाए जा रहे मोबाइल एप में यह आईडी डालेंगे तो यह पता चल जाएगा कि यह ज्वेलरी कब और कहां से खरीदी गई।
मालूम हो कि हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन एक 6 अंक का अल्फान्यूमेरिक कोड है, जो हर ज्वेलरी पर लगता है। इससे उस गहने की एक अलग पहचान बनती है। सोने की शुद्धता की गारंटी देने वाली हॉलमार्किंग में कैरेट के साथ ये कोड डाला जाता है। एचयूआईडी से कहीं भी पता चलता है कि उसका निर्माता कौन है, वजन क्या है, जेवर किसे बेचा गया और किस हॉलमार्किंग सेंटर में उसे यह कोड दिया गया है।


