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कबाड़ में पुस्तकें मिलने पर नांदगांव टीबीसी डिपो प्रभारी निलंबित
24-Feb-2021 12:33 PM
कबाड़ में पुस्तकें मिलने पर नांदगांव टीबीसी डिपो प्रभारी निलंबित

   पापुनि अध्यक्ष ने त्वरित कार्रवाई कर मौके पर भेजा जांच दल  

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 24 फरवरी।
राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव के बरसनटोला स्थित एक निजी पेपर मिल में सरकारी पुस्तकों के कबाड़ में मिलने के मामले में पाठ्य पुस्तक निगम ने एक बड़ी कार्रवाई करते राजनंादगांव डिपो प्रभारी को तत्काल निलंबित कर दिया है। वहीं पूरे मामले की छानबीन के लिए एक जांच दल भी गठित की है। बताया गया है कि जांच दल मौके लिए रवाना हो गया है। जांच दल की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

धनलक्ष्मी पेपर मिल में दो दिन पहले 21 फरवरी को मिले भारी मात्रा में सरकारी पुस्तक मिलने के मामले में संज्ञान लेते हुए पापुनि अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डिपो प्रभारी यशोधरा सरोटे को निलंबित कर दिया है। वहीं उन्होंने घटना की जांच के लिए एक दल को मौके लिए भेजा है। 
इस संबंध में श्री त्रिवेदी ने ‘छत्तीसगढ़’ से कहा कि प्रथम दृष्टया डिपो प्रभारी की  लापरवाही सामने आई है, इसलिए उन्हें निलंबित किया गया है और पापुनि द्वारा गठित जांच दल पूरे मामले की छानबीन कर रहा है। 

धन लक्ष्मी पेपर मिल में गरीब बच्चों को दी जाने वाली सरकारी पुस्तकों की एक बड़ी खेप कबाड़ में मिली है। जिसमें 2017-18 के अलावा 2020-21 की नई पुस्तकें बरामद की गई है। डोंगरगांव थाना प्रभारी केपी मरकाम ने बताया कि धारा 102 के तहत मामले की कार्रवाई की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि सरकारी पुस्तकें मिल के कबाड़ में कैसे पहुंची। 

मिली जानकारी के मुताबिक धनलक्ष्मी पेपर मिल में करीब 200 नग अलग-अलग कक्षाओं की पुस्तकें मिली है। उक्त पुस्तकों में 2017-18 और 2020-21 की पुस्तकें जब्त की गई है। बताया जा रहा है कि मिल संचालक द्वारा कंटेनर में भारी मात्रा में बाहर से कबाड़ की खरीदी की गई है। जिसमें यह पुस्तकें मिली है। पुलिस का कहना है कि पुस्तकों के संबंध में जानकारी ली जा रही है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
 
मिल संचालक विनोद लोहिया ने पुलिस को सफाई देते बताया कि कच्चे माल के रूप में अन्य राज्यों से रद्दी माल खरीदा जाता है। यह बता पाना संभव नहीं है कि उक्त पुस्तकें कैसे पहुंची। सूत्रों का कहना है कि सरकारी पुस्तकों को कबाड़ के रूप में बेचे जाने का भी एक गंभीर मामला बन सकता है। माना जा रहा है कि सरकारी पुस्तकों को रद्दी में बेचने का खेल लंबे समय से किया जा रहा है। पापुनि के जरिये गरीब बच्चों को सरकार मुफ्त शिक्षा के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराती है। ऐसे में नए पुस्तकों के मिलने से पूरा मामला संगीन हो गया है। पापुनि और पुलिस की जांच में इससे पर्दा हटेगा। 


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