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केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर किए हलफ़नामे में कहा है कि फ़ेसबुक और ट्विटर किसी भी राज्य की विधानसभा के प्रति जवाबदेह नहीं हो सकते हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार में छपी ख़बर के अनुसार, केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स के पास 'देश को अस्थिर करने की शक्ति है' और 'क़ानून-व्यवस्था की समस्याओं को खड़े करने की ओर झुकाव होता है.'
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सिर्फ़ संसद और उसकी समितियों के पास ही सोशल मीडिया से जुड़े मुद्दों से निपटने का अधिकार है.
उन्होंने कहा कि अगर भारतीय संघ की हर एक इकाई इन जैसी चीज़ों की जांच करने लगेगी तो यह ख़तरनाक होगा.
दरअसल, दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव समिति ने पिछले साल फ़रवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों में सोशल नेटवर्किंग पोर्टल की भूमिका को लेकर भारत में फ़ेसबुक प्रमुख अजित मोहन को समन जारी किया था.
इस समन को अजित मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिस पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाख़िल किया है. (bbc.com)


