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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 18 फरवरी। प्रदेश के पावर प्लांट और दूसरे संयंत्रों में कोयला जलने से हो रहे वायु प्रदूषण को रोकने के लिये पर्याप्त कदम नहीं उठाये गये हैं। इसे लेकर दायर जनहित याचिका पर शासन व सम्बन्धित अन्य पक्षों से हाईकोर्ट ने कई बार जवाब मांगा है लेकिन प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया है।
रिटायर्ड मुख्य अभियंता आरएन गुप्ता द्वारा दायर जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस पी.आर. रामचंद्र मेनन और जस्टिस पी.पी. साहू की डबल बेंच में बुधवार को हुई। याचिकाकर्ता ने कहा है कि बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, रायपुर, जांजगीर-चाम्पा व भिलाई में करीब 20 हजार मेगावाट के पावर प्लांट संचालित किये जा रहे हैं। इसके अलावा भी कुछ अन्य उद्योग हैं जिनमें कोयले का प्रयोग होता है। इनके धुंए से लोगों को सांस की बीमारी व चर्म रोग हो रहा है। इसके अलावा खेती को नुकसान पहुंच रहा है। कोयले से उत्सर्जित सल्फर डाइआक्साइड, मीथेन आदि गैस बहुत खतरनाक है। पर्यावरण विभाग द्वारा प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिये मापदंडों का पालन नहीं कराया जा रहा है, साथ ही स्वास्थ्य विभाग इस खतरे के प्रति सजग नहीं है।


