ताजा खबर
हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित एक साक्षात्कार में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने बीजेपी में जानें की अटकलों पर जवाब देते हुए कहा है कि जब कश्मीर में काली बर्फ़ पड़ेगी तो वो बीजेपी में चले जाएंगे.
ग़ुलाम नबी आज़ाद का राज्यसभा में कार्यकाल सोमवार को समाप्त हो रहा है. वो चार दशकों से संसद के सदस्य रहे हैं.
संसद में ग़ुलाम नबी आज़ाद की विदाई के दौरान बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भावुक हो गए थे.
प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने रिश्ते के बारे में आज़ाद ने कहा, 'हम 90 के दशक से एक-दूसरे को जानते हैं. हम दोनों ही महासचिव थे और हम विपक्षी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने टीवी बहस में शामिल होते थे. बहस में हम लड़ते भी थे. लेकिन जब हम जल्दी पहुँच जाते थे तो हम साथ में चाय भी पीते थे और बातचीत भी करते थे. बाद में हम दोनों की एक दूसरे से पहचान मुख्यमंत्रियों के तौर पर हुई और हम किसी ना किसी मुद्दे पर दस-पंद्रह दिनों में बात कर ही लेते थे.'
प्रधानमंत्री के भावुक होने के बारे में ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'जब हम दोनों रो रहे थे तो उसकी वजह ये नहीं थी कि हम एक दूसरे को अच्छे से जानते थे बल्कि वजह ये थी कि साल 2006 में कश्मीर में गुजराती पर्यटकों की बस पर हमला हो गया था, उनसे बात करते हुए मैं रोने लगा था. प्रधानमंत्री ये कह रहे थे कि ऐसा इंसान रिटायर हो रहा है जो एक अच्छा इंसान भी है. वो उस बात को पूरा नहीं कर सके क्योंकि वो भावुक हो गए और फिर जब मैंने वो बात पूरी करनी चाही तो मैं भी नहीं कर सका क्योंकि मुझे लगा कि मैं चौदह साल पहले उसी समय में पहुँच गया हूं जब बस पर हमला हुआ था.'
जब आज़ाद से पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री की ये भावना कश्मीर के आम लोगों को समझ आएगी तो उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि इससे जम्मू-कश्मीर का मुद्दा प्रभावित नहीं होगा. कश्मीर की पूरी आबादी सिर्फ़ अनुच्छेद 370 को लेकर ही चिंतित नहीं है. राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बना देना बीजेपी के एजेंडे में नहीं था. और राज्य को बाँटने से बहुत लोगों को दुख हुआ है. हमें तो राख बना दिया गया है. मैंने केंद्र शासित प्रदेश को राज्य बनते हुए देखा है और मेरे अपने राज्य को, जो देश के सबसे पुराने और बड़े राज्यों में से एक है को यूटी बना दिया गया है. किसी को ये बर्दाश्त नहीं होगा.'
कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने संसद में प्रधानमंत्री के भावुक होने को 'सोच समझकर किया गया नाटक' कहा था. इस पर आज़ाद ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि किस संदर्भ में, और बहुत से लोगों को इसका बैकग्राउंड नहीं पता है. बहुत से लोगों को ऐसा लगा होगा कि प्रधानमंत्री नाटक कर रहे होंगे क्योंकि वो किसी कांग्रेसी की चिंता क्यों करेंगे. जैसा की मैंने कहा, जो शब्द उन्होंने इस्तेमाल किए, वो मेरे लिए थे, लेकिन हमारी भावनाओं का संदर्भ अलग था.'
जब आज़ाद से उनके बीजेपी में जाने की अटकलों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'जब कश्मीर में काली बर्फ़ पड़ेगी तो मैं बीजेपी में चला जाऊंगा. लेकिन बीजेपी ही क्यों, ये वो दिन होगा जब मैं किसी भी पार्टी में जाऊंगा. जो लोग ऐसा कह रहे हैं या अफ़वाहें फैला रहे हैं वो मुझे नहीं जानते हैं.'
आज़ाद ने कहा, 'जब राजमाता सिंधिया विपक्ष की उपनेता थीं, तब उन्होंने खड़े होकर मुझ पर कुछ आरोप लगाए थे. मैं खड़ा हुआ था और मैंने कहा था कि मैं आरोपों को बहुत गंभीरता से लेता हूं, और सरकार की तरफ़ से मैं अटल बिहारी वाजयेपी के नेतृत्व में समिति बनाने का सुझाव देता हूं, जिसमें वो और एलके आडवाणी जी भी सदस्य हों. मैंने कहा कि वो पंद्रह दिनों में जांच पूरी करें और जो जायज़ हो सज़ा दें. मैं स्वीकार करूंगा. मैंने वाजपेयी का नाम लिया था इसलिए वो आए और पूछा कि ऐसा क्यों. जब मैंने उन्होंने बताया तो वो खड़े हुए और संसद में कहा कि मैं संसद की से और ग़ुलाम नबी आज़ाद से माफ़ी मांगता हूं. हो सकता है राजमाता सिंधिया उन्हें ना जानती हों लेकिन मैं उन्हें जानता हूं.'
साक्षात्कार में आज़ाद से उनके रिटायर होने पर कांग्रेस पार्टी की राय के बारे में भी पूछा गया. उन्होंने कहा, 'पार्टी अध्यक्ष ने मेरे काम की तारीफ़ करते हुए लंबा पत्र लिखा है. उन्होंने कहा है कि संगठन को मज़बूत करने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा, उसके बाद मैंने उनसे मुलाक़ात की है. उन्होंने कहा है कि हमें चुनावों की तैयारी करनी होगी.'
आज़ाद ने इस बीच राहुल गांधी से भी दो बार मुलाक़ात की है.
जब उनसे हिंदुस्तानी मुसलमान के बयान पर पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मैंने एएमयू में दिए अपने भाषण में कहा था कि देश का माहौल इतना बदल गया है कि पहले 99 प्रतिशत उम्मीदवार मुझे अपने चुनाव अभियान में बुलाते थे लेकिन अब निमंत्रणों की संख्या 40 फ़ीसदी ही रह गई है. मेरा संदेश वहां मौजूद पूर्व छात्रों को भी था. मैंने उनसे कहा था कि आपको ही एंबेसडर बनना होगा और उस पुराने भारत को फिर से लाना होगा जिसमें मैंने 1979 में महाराष्ट्र की उस सीट से चुनाव लड़ा था जिस पर 95 फ़ीसदी हिंदू वोटर थे. मेरे ख़िलाफ़ जनता पार्टी का हिंदू उम्मीदवार था, लेकिन मैं फिर भी जीता था.' (bbc.com)


