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हसदेव–सरगुजा में खनन के खिलाफ बीटीआई ग्राउंड में उमड़े हजारों लोग
16-Jan-2026 6:09 PM
हसदेव–सरगुजा में खनन के खिलाफ बीटीआई ग्राउंड में उमड़े हजारों लोग

ग्राम सभा की अनदेखी कर शुरू की गई परियोजनाओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

रायपुर, 16 जनवरी। जल-जंगल-जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए आज सरगुजा संभाग के अंबिकापुर में ज़बरदस्त जनआंदोलन देखने को मिला। अंबिकापुर के बीटीआई ग्राउंड में हजारों आदिवासी, किसान, मजदूर, युवा और पर्यावरण प्रेमी एकजुट हुए। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपते हुए पाँचवी अनुसूचित क्षेत्र में ग्रामसभाओं की अनदेखी कर चलाई जा रही खनन परियोजनाओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

संविधान और कानूनों के उल्लंघन का आरोप

ज्ञापन में कहा गया कि सरगुजा संभाग संविधान की पाँचवी अनुसूची में शामिल है, जहाँ पेसा कानून 1996 और भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य है। इसके बावजूद कई खनन परियोजनाओं में ग्रामसभा से बिना सहमति लिए भूमि अधिग्रहण और वन कटाई की जा रही है, जो आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

हसदेव अरण्य पर संकट गहराया

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि हसदेव अरण्य जैसे जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र में परसा और केंते एक्सटेंशन जैसी परियोजनाओं के कारण बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हो रही है। इससे पर्यावरणीय असंतुलन, मानव-हाथी संघर्ष और जलस्रोतों पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय वन्यजीव संस्थान ने 2021 में हसदेव क्षेत्र को खनन-मुक्त रखने की सिफारिश की थी और छत्तीसगढ़ विधानसभा ने जुलाई 2022 में सर्वसम्मति से खनन निरस्त करने का संकल्प पारित किया था।

रामगढ़ पहाड़ और मैनपाट पर भी खतरा

सभा में यह भी बताया गया कि खनन विस्फोटों से रामगढ़ पहाड़ जैसे प्राचीन धार्मिक और पुरातात्विक स्थल में दरारें आ चुकी हैं। वहीं मैनपाट में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन से न केवल प्राकृतिक सौंदर्य बल्कि अंबिकापुर शहर के जलस्रोत भी खतरे में पड़ सकते हैं।

13 सूत्रीय प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन में प्रमुख रूप से ये मांगें रखीं—

हसदेव अरण्य में नई केंते एक्सटेंशन परियोजना की स्वीकृति रद्द हो।

परसा कोल ब्लॉक में पेड़ कटाई तत्काल रोकी जाए।

ग्रामसभा सहमति के बिना चल रही मदननगर व अमेरा विस्तार परियोजनाएं निरस्त हों।

मैनपाट में बॉक्साइट खनन रद्द कर ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाए।

खनन विरोध करने वालों पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं।

पाँचवी अनुसूचित क्षेत्र में हर परियोजना से पहले ग्रामसभा की पूर्व सहमति सुनिश्चित की जाए।

‘हसदेव बचाओ आंदोलन’ की चेतावनी

हसदेव बचाओ आंदोलन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।


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