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लंबे समय से चल रही है खींचतान
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 9 फरवरी। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर और प्रदेश भाजपा महामंत्री भूपेन्द्र सवन्नी के झगड़े के बाद पार्टी के बड़े नेताओं ने खामोशी ओढ़ ली है। खबर है कि पार्टी नेता दो धड़ों में बंट गए हैं। एक ने भूपेन्द्र सवन्नी को पद से हटाने की मांग कर दी है, तो दूसरा धड़ा चंद्राकर पर अनुशासन का डंडा चलाने पर दबाव बना रहा है।
सवन्नी नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के बेहद करीबी माने जाते हैं, और वे पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के भी करीबी हैं। सवन्नी महामंत्री होने के नाते संगठन में काफी पॉवरफुल हैं। उनके पास रायपुर संभाग का प्रभार है, और यहां के सारे कार्यक्रमों में उनका सीधा दखल रहता है। रविवार को केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुख्य आतिथ्य में होने वाले बुद्धिजीवी सम्मेलन के कर्ता धर्ता भी सवन्नी थे। और कई नेता उस दौरान विवाद के लिए भी सीधे तौर पर सवन्नी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
हालांकि प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि उन्होंने खुुद सवन्नी और अजय चंद्राकर से बात की है। थोड़ी बहुत गलतफहमी हो गई थी। सवन्नी के मन में चंद्राकर के लिए कोई बात नहीं है। चंद्राकर थोड़े गुस्सैल स्वभाव के हैं। और इस विवाद का पटाक्षेप हो गया है। साय कोरोना पीडि़त हैं, और वे स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। पूर्व सीएम डॉ.रमन सिंह, सरोज पाण्डेय, पवन साय सहित अन्य बड़े नेताओं ने विवाद पर चुप्पी साधे हुए हैं। विष्णुदेव साय के दावे के विपरीत चर्चा है कि सवन्नी के पक्ष में संगठन में हावी नेताओं ने चंद्राकर के खिलाफ राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नड्डा तक बात पहुंचाई है। वे चंद्राकर के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाने पर दबाव बनाए हुए हैं। जबकि पार्टी के असंतुष्ट नेता और विधायक चंद्राकर के साथ हैं। और असंतुष्ट नेता, सवन्नी को पद से हटाने पर जोर दे रहे हैं।
पार्टी के अंदरखाने से छनकर आई खबर के मुताबिक सवन्नी को ही प्रमुख नेताओं को बुलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। कुल 30 नेता आने थे, जिसमें अजय चंद्राकर भी थे। चंद्राकर पंचायत मामलों के जानकार माने जाते हैं। कहा जा रहा है कि सवन्नी ने सभी नेताओं को एक दिन पहले ही मोबाइल पर सूचना दे दी थी, लेकिन अजय चंद्राकर को कार्यक्रम शुरू होने से करीब पौन घंटा पहले सूचना दी गई। उन्होंने अजय चंद्राकर को मिस कॉल किया, इसके बाद चंद्राकर ने कॉल बैक किया, तो उन्हें कार्यक्रम में आने के लिए कहा गया।
इससे तमतमाए अजय चंद्राकर किसी तरह कार्यक्रम शुरू होने से ठीक पहले वहां पहुंचे, तो सवन्नी को देखते ही फट पड़े। सवन्नी ने सफाई देने की कोशिश की, और इस बीच कुशाभाऊ ठाकरे परिसर के एक कर्मचारी और सवन्नी के करीबी मयूर पटेल वहां पहुंचे, और चंद्राकर से कहा कि बैठक में आमंत्रित लोगों को उन्होंने स्वयं फोन किया था। आपको भी दो बार कॉल किया था, लेकिन मोबाइल नो-रिप्लाई मिला। इस पर चंद्राकर ने अपना मोबाइल उन्हें थमाते हुए कहा कि आपका कब कॉल आया था, बताए। इसके बाद मयूर पटेल वहां से खिसक गए। बाकी नेताओं ने चंद्राकर को समझाइश दी। यह पूरा विवाद केन्द्रीय विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी के सामने हो रहा था।
पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और रामविचार नेताम ने भी अजय चंद्राकर को शांत करने की कोशिश की। अजय चंद्राकर ने केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से संगठन की कार्यप्रणाली की शिकायत करते हुए कहा कि भाई साब, यहां हमेशा ऐसा ही होता है। इसके बाद हरदीप पुरी ने अजय चंद्राकर को गले लगाकर शांत किया। बताया गया कि सवन्नी के खिलाफ पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के खेमे के लोगों ने संगठन में हावी नेताओं के खिलाफ पहले भी शिकायत की थी।
हुआ यूं कि पर्यवेक्षक सवन्नी की मौजूदगी में नगर निगम नेता प्रतिपक्ष के लिए सूर्यकांत राठौर का नाम तय हुआ था, लेकिन आखिरी समय में घोषणा रोक दी गई। हाल यह है कि सालभर बाद भी नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष का नाम तय नहीं हो पाया है। असंतुष्ट नेताओं का यह भी कहना है कि पार्टी विधानसभा, पंचायत और नगरीय निकायों में हार से सबक नहीं सीखी है। मंच में बैठने से लेकर संचालन तक सारी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संगठन के चुनींदा नेता ही संभालते हैं, और समय-समय पर अपनी पसंद और नापसंदगी जाहिर करते रहते हैं। प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी संभवत: अगले हफ्ते यहां आने वाली हैं, इसमें असंतुष्ट नेता इस पूरे घटनाक्रम के साथ ही सारी बातें उनके समझ रख सकते हैं। बहरहाल, पार्टी के भीतर खींचतान बढऩे के आसार दिख रहे हैं।


