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महुआ मोइत्रा ने लोकसभा में पूर्व CJI के फैसले पर उठाए सवाल, विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएगी सरकार- सूत्र
09-Feb-2021 9:33 AM
महुआ मोइत्रा ने लोकसभा में पूर्व CJI के फैसले पर उठाए सवाल, विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएगी सरकार- सूत्र

नई दिल्ली. तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार पर ‘कायरता को साहस के रूप में परिभाषित’ करने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि नागरिकता संशोधन कानून लाना, अर्थव्यवस्था की स्थिति, बहुमत के बल पर तीन कृषि कानून लाना इसके उदाहरण हैं. लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को लेकर एक टिप्पणी की. इसका भाजपा सदस्यों और सरकार की ओर से विरोध किया गया.

अब सरकार मोइत्रा के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है. सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज 18 को बताया कि सरकार संसद में मोइत्रा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव ला सकती है. संविधान के अनुच्छेद 121 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज जिसने कोई फैसला दिया हो, उसकी चर्चा संसद में नहीं हो सकती है.

संसद के नियम और प्रक्रिया 352 (5) यह भी तय करते हैं कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के आचरण पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है. सदन में चेयरमैन द्वारा निर्देशित किये जाने के बावजूद नियम 356 का उल्लंघन करते हुए मोइत्रा ने अपने बयानों को दोहराया. राष्ट्रपति के अभिभाषण धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अपने भाषण में उन्होंने सरकार, न्यायपालिका और मीडिया पर कटाक्ष किया था.

संसदीय कार्यमंत्री ने जताई आपत्ति
संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताई और कहा कि इस प्रकार का उल्लेख नहीं किया जा सकता. वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने नियमों का हवाला देते हुए इस पर आपत्ति व्यक्त की. इस पर पीठासीन सभापति एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि अगर महुआ मोइत्रा की बात में कुछ आपत्तिजनक पाया जाता है तो उसे रिकॉर्ड में नहीं रखा जाएगा. मोइत्रा ने कहा, ‘न्यायपालिका अब पवित्र नहीं रह गयी है.’ उन्होंने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को लेकर विवादित टिप्पणी की.

CAA और इकॉनमी पर मोइत्रा ने की टिप्पणी
तृणमूल कांग्रेस सदस्य ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग सत्ता की ताकत, कट्टरता, असत्य को साहस कहते हैं. उन्होंने कहा कि इस सरकार ने दुष्प्रचार और गलत सूचना फैलाने को कुटीर उद्योग बना लिया है. मोइत्रा ने कहा कि इनकी (सरकार की) सबसे बड़ी सफलता ‘कायरता को साहस के रूप’ में परिभाषित करना है.

सांसद ने कहा कि इस सरकार ने एकतरफा ढंग से नागरिकता संशोधन कानून बनाने का काम किया लेकिन काफी समय गुजर जाने के बाद भी इसके नियमों को अधिसूचित नहीं कर पायी. अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2020 में भारत सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला देश रहा. उन्होंने दावा किया कि दो वर्षो तक अर्थव्यवस्था में वृद्धि नहीं होगी.

तीन विवादित कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए मोइत्रा ने कहा कि सरकार कृषि कानून लाई जबकि विपक्ष और किसान संगठन इन्हें किसान विरोधी बता रहे थे. उन्होंने कहा कि इन्हें बिना आम-सहमति और बिना समीक्षा किये लाया गया तथा बहुमत के बल पर लाया गया. तृणमूल कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह केंद्र में सत्तारूढ पार्टी से पूछना चाहती हैं कि क्या इस तरह से लोकतंत्र चलेगा, क्या एक पार्टी का शासन देश में चलेगा. (भाषा इनपुट के साथ)


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