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उत्तराखंड वायुसेना ने शुरु किया राहत और बचाव अभियान
वायुसेना ने बताया है कि उत्तराखंड ग्लेशियर हादसे के बाद हवाई राहत और बचाव कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया है. Mi-17 और एडवांस लाइट हैलीकॉप्टर (ALH) से बचाव टीमों को देहरादून से जोशीमठ भेजा जा रहा है.
उत्तराखंड में चमोली ज़िले के तपोवन में आईटीबीपी के जवानों ने एक सुरंग में फंसे 16 लोगों को निकाल लिया है. हिमालयी ग्लेशियर टूटने के बाद ये लोग सुरंग में फंस गए थे. उत्तराखंड में हिमालयी ग्लेशियर के फटने से कई ज़िलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.
उत्तराखंड के चमोली ज़िले में ग्लेशियर फटने की घटना से ऋषिगंगा घाटी में अचानक आई बाढ़ के बाद बचाव कार्य जारी है और सुरंगों में फँसे मज़दूरों को निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं.
अधिकारियों के अनुसार अब तक 8 शव बरामद किए गए हैं जबकि 170 लोग लापता हैं.
Aerial rescue & relief missions have resumed with Mi-17 & ALH helicopters flying from Dehradun to Joshimath with disaster relief teams on board: Indian Air Force#Uttarakhand pic.twitter.com/RplNQxbayO
— ANI (@ANI) February 8, 2021
आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक कुमार पांडे ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, "हमने दूसरी टनल के लिए सर्च ऑपरेशन तेज़ कर दिया है, वहां क़रीब 30 लोगों के फंसे होने की सूचना है. आईटीबीपी के 300 जवान टनल को क्लियर करने में लगे हैं जिससे लोगों को निकाला जा सके. स्थानीय प्रशासन के मुताबिक 170 लोग इस आपदा में लापता हैं."
प्रवक्ता ने बताया कि सुरंगों के आस-पास काफ़ी मलबा होने के कारण मशीनों की मदद से ही बचाव कार्य शुरू किया जा सकता था. उन्होंने उम्मीद जताई कि सुरंग के भीतर से लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकेगा.
बचाव कार्य में आईटीबीपी, एनडीआरएफ़ और एसडीआरएफ़ की टीमें जुटी हुई हैंं.
इस त्रासदी में तपोवन हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर डैम जिसे ऋषिगंगा प्रोजेक्ट के नाम से भी जाना जाता है, पूरी तरह तबाह हो चुका है.
हादसा कैसे हुआ
रविवार सुबह दस बजे के आस-पास उत्तराखंड के चमोली ज़िले में कुछ नदियों में अचानक से पानी बढ़ गया.
दरअसल नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने से भूस्खलन हुआ और धौली गंगा, ऋषि गंगा और अलकनंदा नदियों में पानी का स्तर बढ़ गया जिससे अफ़रा-तफ़री मच गई.
Every life matters, every hand helps!
— Uttarakhand Police (@uttarakhandcops) February 7, 2021
We carries out rescue operations in #Chamoli, Uttarakhand @Ashokkumarips pic.twitter.com/Dpzbm5EsJX
इससे वहाँ एनटीपीसी की दो पनबिजली परियोजनाओं - तपोवन-विष्णुगढ़ परियोजना और ऋषि गंगा परियोजना - को नुक़सान पहुँचा.
इन परियोजनाओं से जुड़ी सुरंगों में पानी भर गया और वहाँ मज़दूर फँस गए.
पानी के रास्ते में आने वाले कई घर भी बह गए. निचले इलाक़ों में आबादी वाले इलाक़ों में भी नुक़सान की आशंका है.
प्रशासन ने ख़तरे को देख फ़ौरन कई गाँवों को खाली करवाया और लोगों को सुरक्षित इलाक़ों में ले जाया गया.
पानी का स्तर बढ़ने के कारण बचाव कार्य को बीती रात कुछ देर रोकना पड़ा था.
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि ‘’इस कठिन समय में मोदी सरकार उत्तराखण्ड की जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है. एनडीआरएफ़, आईटीबीपी और एसडीआरएफ़ की टीमें वहाँ पहुँच गई हैं. वायुसेना को भी अलर्ट पर रखा गया है.’’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे मरने वालों उनके परिजनों को 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया है. उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की राहत राशि देने का ऐलान किया है. (bbc.com)


