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कृषि कानून वापिसी की मांग, चेतावनी
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 14 दिसंबर। दिल्ली किसान आंदोलन के समर्थन में प्रदेश के किसान भी आज से यहां बूढ़ातालाब धरना स्थल पर क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इसी तरह बिलासपुर, जगदलपुर, रायगढ़ आदि जगहों पर भी किसान भूख हड़ताल शुरूकर प्रदर्शन करनेे लगे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि नए कृषि कानून तुरंत वापस ना लेने पर ब्लॉक स्तर तक आंदोलन का विस्तार किया जाएगा। किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार किसान विरोधी काले कानून को तुरंत वापिस लें।
छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ से सम्बद्ध कई किसान एवं सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित आंदोलन के पहले दिन डॉ.संकेत ठाकुर, विश्वजीत हारोड़े, लक्ष्मी नारायण चन्द्राकर, लता शर्मा, सौरा यादव आदि भूख हड़ताल पर बैठे रहे। दिल्ली आंदोलन के समर्थन में छत्तीसगढ़ के किसानों ने भी देशव्यापी किसान आंदोलन को लेकर एकजुटता दिखाई है।
किसान महासंघ के संयोजक मंडल सदस्य कृषि वैज्ञानिक डॉ.संकेत ठाकुर ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में हो रहे किसान आंदोलन की आंच अब छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में फैल रही है और भूख हड़ताल का विस्तार अब ब्लाक स्तर तक किया जाएगा।
किसान नेता लक्ष्मी नारायण चन्द्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसान अब समझ गए है कि तीनों नये कृषि कानून छत्तीसगढ़ भविष्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी धान खरीदी को रोक देंगे। इसीलिए जब तक ये कानून रद्द नहीं होंगे, किसान आंदोलन फैलता जाएगा।
किसान नेता सौरा यादव ने कहा कि कथित कृषि सुधार के नाम पर केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा कॉरपोरेट घरानों के हित में किसान, कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी कानून को गैर लोकतांत्रिक तरीके से पारित कराया है। इस कानून का अध्यादेश लाए जाने के समय से ही विरोध किया जा रहा है। लेकिन मोदी सरकार ने इसे विपक्षी पार्टियों द्वारा फैलाये जा रहे भ्रम बताकर किसान आंदोलन को हल्के में लिया है, जिसके चलते दिल्ली में देशव्यापी किसान आंदोलन आगे बढ़ रहा है।


