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(राखी त्रिपाठी)
कोच्चि, 13 जनवरी। पूर्व और पश्चिमी दुनिया को जोड़ने वाले ‘स्पाइस रूट’ को आमतौर पर मसालों के व्यापार से जोड़कर देखा जाता रहा है लेकिन यह ऐतिहासिक समुद्री रास्ता केवल काली मिर्च, दालचीनी या जायफल और अन्य मसालों के व्यापार तक ही सीमित नहीं था बल्कि इनके साथ ही ग्रंथ, ज्ञान, विचार, भाषाएं और तकनीक भी समुद्र के रास्ते आवाजाही करती रहीं।
स्पाइस रूट के मार्ग में केरल का प्राचीन बंदरगाह मुजिरिस इस बौद्धिक और सांस्कृतिक आवाजाही का एक अहम केंद्र था जिसने एशिया, अफ्रीका और यूरोप को आपस में जोड़ा।
स्पाइस रूट की इस साझा विरासत से लोगों को रूबरू करवाने और ऐतिहासिक समुद्री व्यापार मार्गों, सांस्कृतिक संपर्कों और साझा वैश्विक विरासत को समकालीन संदर्भ में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से केरल के कोच्चि में छह से आठ जनवरी तक ‘इंटरनेशनल स्पाइस रूट्स कॉन्फ्रेंस’ का आयोजन किया गया।
इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन केरल सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुजिरिस हेरिटेज परियोजना’ के तहत किया गया था।
सम्मेलन में भाग लेने वाले शिक्षाविद प्रो. इलयास ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में बताया, “यह वह दौर था जब आधुनिक राष्ट्र का उदय नहीं हुआ था लेकिन इसके बावजूद दुनिया के कई हिस्से आपस में गहराई से जुड़े हुए थे।”
उन्होंने बताया कि इसे “ओरिएंटल ग्लोबलाइजेशन” कहा जा सकता है, जिसमें मसालों के व्यापार के कारण विभिन्न अर्थव्यवस्थाएं और सभ्यताएं एक वैश्विक ढांचे में जुड़ गई थीं। इस नेटवर्क में मालाबार तट की भूमिका केंद्रीय थी।
प्रो. इलयास बताते हैं कि इस समुद्री संपर्क का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहा।
सम्मेलन से इतर बातचीत में उन्होंने कहा, “स्पाइस रूट से भाषा, विचार और ग्रंथ भी समुद्र पार गए और दूसरी सभ्यताओं ने भी केरल की संस्कृति को प्रभावित किया। कई ऐसे ग्रंथ थे जो किसी एक स्थान पर रचे गए लेकिन उनका प्रसार दूर-दराज़ क्षेत्रों तक हुआ।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि तमिलनाडु में रचित गणित का ग्रंथ कणकाधिकारम केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया तक उसके प्रयोग के प्रमाण मिलते हैं। उन्होंने बताया कि इसी तरह, मलयाली विद्वान द्वारा लिखा गया न्यायशास्त्र का ग्रंथ फतहुल मुईन दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापक रूप से पढ़ा जाता रहा।
नई भाषाओं को जन्म देने और कई भाषाओं के मिश्रण में स्पाइस रूट्स की भूमिका संबंधी सवाल पर प्रो. इलियास ने बताया, “व्यापारिक संपर्कों के कारण कई नयी भाषाओं ने जन्म लिया और कई भाषाओं के मिश्रित रूप भी प्रयोग किए जाने लगे।”
उन्होंने बताया, “अरबी भाषा के अलग-अलग रूप सामने आए जैसे तमिल और अरबी के मेल से अरवी, केरल में अरबी-मलयालम और दक्षिण एशिया में मलय और अरबी के मिश्रण का इस्तेमाल किया जाता था। इसी तरह, हिब्रु भाषा का एक अलग रूप केरल में यहूदी-मलयालम के रूप में मिलता है और सुरियानी(सीरिया)-मलयालम का मिश्रण गरशुनी अस्तित्व में आया। हमारे पास कई ऐसे लेख हैं जो गरशुनी में लिखे गए है। यह सभी भाषाई रूप इस बात के प्रमाण हैं कि व्यापार केवल वस्तुओं का नहीं, बल्कि भाषा ज्ञान और संस्कृति का भी आदान-प्रदान था।”
इस समुद्री नेटवर्क के साथ लोगों का आवागमन भी जुड़ा था।
प्रो. इलयास ने कहा कि मसाला व्यापार से जुड़े कारोबारियों ने अलग-अलग देशों में जाकर स्थायी बस्तियां बसायीं। व्यापार के सिलसिले में कई प्रवासी भारत आए, कई अरब देश तथा अफ्रीका में जाकर बस गए।
उन्होंने कहा, “ ऐसे ऐतिहासिक स्रोत मौजूद हैं जो पश्चिम एशिया और मालाबार के बीच लोगों और वस्तुओं की आवाजाही के स्पष्ट प्रमाण देते हैं।”
प्रो. इलयास के अनुसार, मसालों के व्यापार ने तकनीक और ज्ञान के हस्तांतरण को भी संभव बनाया। नौका निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ी जानकारियाँ एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुँचीं।
उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि केरल के निवासी नौका निर्माण के लिए ओमान, यमन और अन्य जगहों पर जाते थे।
मुजिरिस इस पूरी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। ऐतिहासिक दस्तावेजों में मुजिरिस को सबसे पुराना बंदरगाह बताया गया है।
प्रो. इलयास कहते हैं, “मुजिरिस उस वैश्वीकरण का हिस्सा था जो मसालों के व्यापार पर आधारित था।”
पट्टनम उत्खनन से मिले पुरातात्विक साक्ष्य दक्षिणी अरब, रोम, पूर्वी और उत्तरी अफ्रीका के साथ इसके (मुजिरिस) संपर्क की पुष्टि करते हैं।
आज जब स्पाइस रूट्स को विरासत और पर्यटन के माध्यम के रूप में फिर से देखा जा रहा है तो प्रो. इलयास मानते हैं कि इसका उद्देश्य केवल अतीत की स्मृति नहीं है। उनके अनुसार, यह उस बहुसांस्कृतिक और सह-अस्तित्व वाले जीवन की याद दिलाता है, जो विभिन्न मसालों के व्यापार के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ा।
उन्होंने कहा, “मुजिरिस एक ऐसा स्थान था जहां लोग आए, साथ रहे, एक-दूसरे की भाषा, संस्कृति और सभ्यता को समझा।”
यही वजह है कि स्पाइस रूट्स केवल व्यापार का इतिहास नहीं, बल्कि ज्ञान, ग्रंथ और विचारों की उस यात्रा की कहानी है जिसने समुद्र के रास्ते पूरी दुनिया को जोड़ा। (भाषा)


