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जोगी के वोटों का बिखराब थामने कांग्रेस की जबरदस्त किलेबंदी
30-Oct-2020 10:15 AM
जोगी के वोटों का बिखराब थामने कांग्रेस की जबरदस्त किलेबंदी

मरवाही से राजेश अग्रवाल का आँखों देखा हाल 

भाजपा भी मौका नहीं चूकना चाहती

बिलासपुर, 30 अक्टूबर('छत्तीसगढ़')। मरवाही विधानसभा में चुनाव प्रचार अंतिम दौर पर पहुंच चुका है। कांग्रेस भाजपा के बीच सीधे मुकाबले में बाजी कौन जीतेगा हर चौक चौराहे पर यही चर्चा है। धुआंधार प्रचार अभियान में कांग्रेस प्रदेशभर से आये नेताओं की बदौलत आगे दिखाई दे रही है जबकि भाजपा अंदरूनी पकड़ को मजबूत बनाये रखने पर जोर लगा रही है। जनता कांग्रेस के मैदान से बाहर होने के बाद नतीजा इस पर ही टिका रह गया है कि स्व. अजीत जोगी को पिछले चुनाव में मिले 74 हजार वोटों पर कौन जादू कर सकता है। दिग्गज नेताओं की मौजूदगी के चलते कौन प्रत्याशी चुनाव लड़ रहा है, यह सवाल पीछे रह गया है।

मरवाही के चुनाव परिणाम यदि खिलाफ में गये तो कांग्रेस की सरकार पर कोई खतरा नहीं है लेकिन इसके कई नेताओं का भविष्य जरूर दांव पर लगा है। चुनाव के बाद निगम, मंडल, आयोगों में नियुक्ति की सूची फिर जारी होगी। बिलासपुर व कोरबा जिले के दूसरे क्रम के नेताओं को अलग-अलग सेक्टर पर जिम्मेदारी दे दी गई है जिसमें उन्हें अपनी पार्टी को बढ़त दिलानी होगी। इनमें कई विधायक, पूर्व विधायक व प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी शामिल हैं। जाहिर है उनके सेक्टर में कांग्रेस को बढ़त मिली तो पार्टी उन्हें पुरस्कृत करेगी। कांग्रेस ने इसके लिये मापदंड पिछले चुनाव में कांग्रेस और जोगी कांग्रेस को मिले कुल मतों को मापदंड बनाया हुआ है। हर एक सेक्टर प्रभारी के पास एक सूची है जिसमें सन् 2018 में मिले वोटों का आंकड़ा बूथ और पंचायत के स्तर पर दर्ज है। भाजपा के परम्परागत वोटों को बदलने में वे ज्यादा मेहनत नहीं कर रहे हैं हालांकि भाजपा के कई पूर्व प्रत्याशियों सहित स्थानीय नेताओं को अपने साथ लेने में वे सफल रहे हैं।

भाजपा को पिछले चुनाव में 27 हजार 579 वोट मिले थे। हर चुनाव में 5-10 हजार के अंतर के साथ इतने ही वोट मिलते रहे हैं। यह तब होता था जब स्व. अजीत जोगी और अमित जोगी मैदान में रहे। भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, केन्द्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह सहित अनेक नेताओं को चुनाव अभियान में उतार रखा है। भाजपा के पारम्परिक वोटों को सहेजे रखने के लिये पार्टी का स्थानीय कैडर हाट-बाजारों में बाइक रैलियां, छोटी-छोटी सभायें कर रहा है जबकि कार से पहुंच रहे डॉ. रमन सिंह की 29 अक्टूबर को हुई सभाओं में भी संतोषजनक लोग पहुंचे। हालांकि रोड शो में नेताओं और वाहनों की संख्या अधिक दिखी। भाजपा की कोशिश है कि वह जोगी समर्थकों के वोटों को अपनी दिशा में पलटने की। इसमें अप्रत्यक्ष रूप से छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस और जोगी के प्रति आस्था रखने वालों का भी उनको साथ मिल रहा है। भाजपा नेता अपनी सभाओं में जोगी के साथ ‘अन्याय’ का बदला लेने के लिये मतदाताओं को प्रेरित कर रहे या उकसा रहे हैं। विधायक डॉ. रेणु जोगी ने क्षेत्र में जनसम्पर्क, सभायें लेने की अनुमति मांगी थी, पर निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें नहीं दी। इसके बाद वे सभायें नहीं ले रही हैं पर सम्पर्क जारी है। मझगवां के साप्ताहिक बाजार में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की एक ओर सभा थी तो दूसरी ओर डॉ. रेणु जोगी लोगों के बीच जोगी की आत्मकथा बांट रही थीं। देखने में यह पूरी तरह गैर राजनैतिक कार्यक्रम लग रहा था पर वहां मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि हमें उनके साथ के लोगों द्वारा वोट के जरिये जोगी के साथ ‘न्याय’ करने के लिये कहा जा रहा है।

कोटमी और सिवनी में कई ग्रामीणों से बात करने पर कुछ लोगों ने कहा कि यदि अमित जोगी मैदान में होते तो निश्चित रूप से एक बार उन्हें और वोट देते क्योंकि यह जोगी को श्रद्धांजलि होती। पर अब मैदान में नहीं है तो हम कांग्रेस को वोट देंगे क्योंकि परम्परागत रूप से हम कांग्रेस के ही वोटर रहे हैं। कुछ लोगों की संख्या ऐसी थी जो कह रहे थे कि अमित जोगी को चुनाव लड़ने से रोके जाने के कारण अब वे विचार करेंगे कि कांग्रेस को वोट दें या न दें। भीतरी गांवों में सिर्फ यह दिखाई दे रहा है कि कांग्रेस और भाजपा मैदान में है। जोगी के साथ अन्याय की बात भाजपा और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के पदाधिकारियों के माध्यम से पहुंच रही है। भाजपा ने स्थानीय और बाहरी के मुद्दे को भी अपने चुनाव अभियान का प्रमुख हिस्सा बना रखा है। वे कांग्रेस उम्मीदवार को बाहरी (बलौदाबाजार) बता रहे हैं।  

जोगी का नाम लेना बंद किया कांग्रेस ने

विधायक डॉ. रेणु जोगी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम के खिलाफ स्व. अजीत जोगी के बारे में सभाओं में नकली, फर्जी आदि कहे जाने को लेकर शिकायत की है। इसके पहले भी कई नेता जोगी का नाम मतदाताओं के दिमाग से हटाने के लिये इसी तरह की बातों का अपने भाषणों में इस्तेमाल करते थे लेकिन पिछले तीन चार दिनों से कार्यकर्ताओं को सख्त हिदायत दे दी गई है कि वे उनका नाम लेकर मतदाताओं के जख्म को न कुरेदें। खासकर असली-नकली का सवाल न उठायें। इसकी विपरीत प्रतिक्रिया हो सकती है। दो दिन से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव के भाषणों में भी यह दिखाई दे रहा है। वे यह कह रहे हैं कि पीछे 15 सालों से मरवाही गौरेला को जिला नहीं बनने देकर विकास को रोककर रखा गया था। पर, किसने रोका- भाजपा ने। डॉ. रमन सिंह तथा पूर्ववर्ती भाजपा सरकार कांग्रेस नेताओं के निशाने में है पर जोगी को वे नहीं छू रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 29 अक्टूबर को एक बड़ी सभा जोगी के ग्राम जोगीसार में ली। वहां अच्छी भीड़ पहुंची। यहां उन्होंने मंच से हीरासिंह मरकाम को श्रद्धांजलि भी दी। मंच पर कई स्थानीय नेता आये जो कभी जोगी के साथ थे।

जोगी के लिये काम करने वाले कांग्रेस में

छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस मैदान में नहीं है पर उसके पहले ही कांग्रेस ने एक रणनीति के तहत जोगी के करीबियों को अपने पाले में ले लिया। शिवनारायण तिवारी और ज्ञानेन्द्र उपाध्याय जोगी के साथ साये की तरह रहने वाले लोग थे लेकिन अब वे कांग्रेस में आ चुके हैं। बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी गुलाब सिंह राज को इस बार टिकट नहीं देने से मरवाही के एक बड़े इलाके में उनके समाज के लोगों में रोष था पर अब वे सक्रिय हो गये हैं। जोगी समर्थक स्थानीय कार्यकर्ताओं को खासकर पंचायत प्रतिनिधियों को कांग्रेस में वे लेकर आ गये हैं। सब कांग्रेस का प्रचार करने में लगे हुए हैं।

जोगीसार में 50-50 फीसदी गिरेंगे वोट

प्रत्यक्ष रूप से जोगीसार के सरपंच लालजी सिंह कंवर, जनपद सदस्य लखन सिंह कंवर जैसे कार्यकर्ता कांग्रेस के साथ दिखाई देते हैं, मुख्यमंत्री बघेल की सभा भी यहां पर हो गई लेकिन जोगीसार के ग्रामीणों से बात करने पर पता चला कि इस गांव के वोट अब भी आधे कांग्रेस के खिलाफ या फिर नोटा में जायेंगे। इसकी वजह वही कि जोगी को चुनाव लड़ने से रोके जाने की वजह वे कांग्रेस को मानते हैं। बता दें कि नोटा में पिछली बार मरवाही विधानसभा में 4500 से ज्यादा वोट गिरे थे।

कांग्रेस भाजपा दोनों ने ही यहां भारी संख्या में बाहरी कार्यकर्ताओं की तैनाती कर रखी है। चूंकि कांग्रेस में सत्ता से जुड़े हुए लोग अधिक हैं और उनके साथ सुरक्षा दस्ते भी अधिक चल रहे हैं इसके चलते उनकी मौजूदगी ज्यादा दिखाई दे रही है। दूसरे क्रम के नेता, प्रदेश स्तर के पदाधिकारी अति उत्साह में मतदाताओं से सीधे सम्पर्क कर रहे पर कई स्थानों में देखने को मिल रहा है कि वे स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले नेताओं को उपेक्षित भी कर रहे हैं। इसका नुकसान भी हो सकता है।

सन् 2006 में मरवाही विधानसभा से सटे कोटा विधानसभा में स्व. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ला के बाद उप चुनाव हुआ था। इसमें भाजपा की ओर से दो दर्जन वीआईपी जिसमें छत्तीसगढ़ के मंत्री भी शामिल थे, कई दिनों तक डेरा डाले हुए थे। इस चुनाव में हेमामालिनी जैसी सिलेब्रिटी भी पहुंची। भाजपा प्रत्याशी मूलचंद खंडेलवाल के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं थी भाजपा सत्ता में होने के बावजूद अपने पक्ष में परिणाम नहीं कर सकी।

प्रदेश में दो तिहाई बहुमत वाली कांग्रेस के लिये मरवाही का चुनाव इसलिये महत्व रखता है कि वे जोगी के गढ़ पर कब्जा कर प्रदेश को ही नहीं बल्कि हाईकमान को संदेश दे सकें। इसमें सीधे सीधे पार्टी के शीर्ष नेताओं की प्रतिष्ठा जुड़ गई है। दूसरी तरफ पिछले चुनाव में बुरी तरह पराजित भाजपा का अभियान सामूहिक है। चुनाव जीतने पर वह और आक्रामक होगी और भविष्य में पार्टी का जनाधार वापस हासिल करने में मदद मिलेगी।


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