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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 14 जनवरी। घर में अकेली नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म के मामले में अदालत ने दो दोषियों को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
यह मामला सरकंडा थाना क्षेत्र का है। 26 जनवरी 2022 को 14 वर्षीय किशोरी घर में अकेली थी। इसी दौरान उसका रिश्तेदार अपने दोस्त के साथ घर पहुंचा और दोनों ने मिलकर उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया। आरोपियों ने बच्ची को धमकाया कि यदि उसने किसी को बताया तो उसकी जान ले लेंगे।
डर और धमकी के कारण किशोरी लंबे समय तक चुप रही। करीब छह महीने बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। इलाज के लिए अस्पताल ले जाने पर सोनोग्राफी में सामने आया कि वह सात माह की गर्भवती है। इसके बाद पीड़िता ने अपनी मां को पूरी घटना बताई। मां की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
मामले की सुनवाई प्रथम एफटीएससी कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह साबित किया कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनीषा नंदी ने प्रभावी पैरवी की।
साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 500-500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म अत्यंत गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में कठोर सजा देना जरूरी है, ताकि समाज में डर पैदा हो और अपराधियों को स्पष्ट चेतावनी मिले।


