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आदिवासी इलाकों में नगर पंचायत गठन पर राजभवन और सरकार आमने-सामने
29-Sep-2020 5:43 PM
आदिवासी इलाकों में नगर पंचायत गठन पर राजभवन और सरकार आमने-सामने

राज्यपाल ने आपत्ति जताई, रिपोर्ट मांगी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 29 सितंबर।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में नए नगर पंचायतों के गठन को लेकर राजभवन और सरकार आमने-सामने आ गए हैं। राज्यपाल ने इस पर आपत्ति की है, और कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिका अधिनियम 1961 के तहत ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाते समय संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने पूरे मामले में सरकार से एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
 
राज्यपाल ने मरवाही, पेंड्रा और गौरेला को नगर पंचायत का दर्जा देने पर असहमति जताई है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इन क्षेत्रों में राज्यपाल की अनुमति के बिना कोई भी परिवर्तन नहीं किया जा सकता, किन्तु पूर्व में भी इस संबंध में विधिवत रूप से अनुमति नहीं ली गई थी और हाल में भी बिना अनुमति के यह परिवर्तन किए गए हैं, यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए पांचवी अनुसूची के प्रावधानों को लागू करें। उन्होंने मंगलवार को संबंधित विभागों के अफसरों की बैठक बुलाई और कहा कि इन सब प्रक्रियाओं की कार्यवाही की समीक्षा कर प्रतिवेदन एक सप्ताह में प्रस्तुत करें। राज्यपाल ने यह निर्देश आज यहां राजभवन में अधिसूचित क्षेत्र में ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत में परिवर्तन करने के संबंध में वैधानिक स्थिति की समीक्षा बैठक में दिए। उन्होंने कहा कि इस विषय में वे मुख्यमंत्री से भी चर्चा कर आवश्यक कार्यवाही करेंगी।

राज्यपाल ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून 1996 लागू है और इसके तहत ग्राम सभा को विशेष अधिकार दिए गए हैं। ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाने से वहां के लोग पेसा कानून के प्रावधानों से वंचित हो जाते हैं। अनुसूचित क्षेत्र के नगर पंचायतों के लिए मेसा कानून अभी संसद द्वारा पारित नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में राज्यपाल की अनुमति के बिना कोई भी कार्यवाही किया जाना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाकर संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत पहले भी कार्य किया गया था और अभी भी किया जा रहा है। 
राज्यपाल ने कहा कि इस संबंध में पूर्व राज्यपाल द्वारा दिये गए सुझाव को भी नहीं अपनाया गया है। उन्होंने कहा कि 04 ग्राम पंचायत अंकार-डौंडी, प्रेमनगर, नरहरपुर, बड़े बचेली को नगर पंचायत बनाये जाने पर उन ग्राम पंचायतों द्वारा दावा आपत्ति कर नगर पंचायत में शामिल न होकर ग्राम पंचायत में रहने का आग्रह किया गया है, उस संबंध में उचित कार्यवाही कर एक सप्ताह के अंदर जानकारी भेजें अन्यथा राज्यपाल उचित कार्यवाही करने के लिए बाध्य होंगी। राज्यपाल ने मरवाही ग्राम पंचायत को नगर पंचायत बनाने के संबंध में समस्त प्रक्रिया रोके जाने के निर्देश दिए।

राज्यपाल ने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों से कहा है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाते समय संविधान के प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए। राज्यपाल ने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों से कहा है कि वे नियम कानूनों की सहीं जानकारी अपने मंत्रियों के समक्ष रखें। उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाने के संबंध में वे विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री से भी चर्चा करेंगी। राज्यपाल ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाने के लिए संविधान के प्रावधानों के अनुसार वैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए, जिससे जनजातियों का अधिकार भी सुरक्षित रह सके।

राज्यपाल ने आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव से कहा कि जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक की सूचना उन्हें अवश्य दी जाए, ताकि  आदिवासियों के कल्याण संबंधी बिन्दु एजेण्डा में शामिल कराया जा सके। इसके साथ ही इन बैठकों में आदिवासियों के संबंध में शामिल किए गए नीतिगत विषयों की जानकारी भी दी जाए। बैठक में राज्यपाल के सचिव सोनमणि बोरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव  डीडी सिंह, नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक सोमिल चौबे और राज्यपाल के विधिक सलाहकार आरके अग्रवाल उपस्थित थे।


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