ताजा खबर
मंत्री ने कहा-भुगतान नियमित आधार पर, बकाया का प्रश्न नहीं उठता
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 18 सितंबर। बिलासपुर भाजपा सांसद अरुण साव द्वारा कल संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (महात्मा गांधी नरेगा) मांग आधारित मजदूरी रोजगार कार्यक्रम है और मजदूरी भुगतान नियमित आधार पर किया जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार द्वारा डीबीटी के तहत पीएफएमएस के माध्यम से राज्य सरकार से फंड ट्रांसफर ऑर्डर (एफटीओ) प्राप्त करने के बाद राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से लाभार्थी के बैंक/डाकघर खाते में सीधे मजदूरी का भुगतान किया जाता है। इस सवाल पर कि कितने दिनों में लंबित राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा-ये प्रश्न नहीं उठता है। हालांकि उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य दैनिक आधार पर लंबित राशि का भुगतान करना है।
मालूम हो कि कोरोना वायरस के चलते उत्पन्न हुए अप्रत्याशित संकट के समाधान के लिए मोदी सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत योजना’ के तहत मनरेगा योजना के बजट में 40 हजार करोड़ रुपये की वृद्धि की थी। इस तरह पूर्व में निर्धारित 61,500 करोड़ रुपये को मिलाकर मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 के लिए मनरेगा योजना का बढक़र 1.01 लाख करोड़ रुपए हो गया। किसी वित्त वर्ष के लिए यह अब तक का सर्वाधिक मनरेगा बजट है, लेकिन हाल ही में कई रिपोर्ट और अध्ययन सामने आए हैं जिसमें पता चला है कि मनरेगा का बजट बहुत तेजी से खत्म हो रहा है। ऐसे में सरकार को अतिरिक्त बजट आवंटन की जरूरत है क्योंकि लॉकडाउन के चलते बहुत बड़ी संख्या में श्रमिक अपने घरों को लौट आए हैं और वे मनरेगा में काम करना चाह रहे हैं।
11.74 लाख को रोजगार नहीं मिला
पीपुल्स एक्शन फॉर एम्प्लॉयमेंट गारंटी (पीईएजी) नाम के एक समूह द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष के करीब पांच महीने में ही मनरेगा का 64 फीसदी बजट खत्म हो चुका है। इतना ही नहीं, रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि 9 सितंबर 2020 तक में काम मांगने वाले 1.55 करोड़ लोगों को काम नहीं मिल पाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, आठ सितंबर 2020 तक उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा काम मांगने वाले 35.01 लाख लोगों को मनरेगा के तहत काम नहीं मिला है। इसी तरह मध्य प्रदेश में 19.38 लाख, पश्चिम बंगाल में 13.03 लाख, राजस्थान में 13.78 लाख, छत्तीसगढ़ में 11.74 लाख और बिहार में 9.98 लाख लोगों को मनरेगा के तहत रोजगार नहीं मिला। वहीं, अप्रैल 2020 से लेकर अब तक में मनरेगा के तहत 85 लाख नए जॉब कार्ड जारी किए गए हैं, जो पिछले सात सालों की तुलना में सर्वाधिक है।
84 हजार को सौ दिन काम मिला
‘मनरेगा ट्रैकर’ नाम से जारी इस रिपोर्ट में योजना के एक और महत्वपूर्ण बिंदु की ओर ध्यान खींचा गया है कि जिन परिवारों ने 100 दिन का काम पूरा कर लिया है, उनका आगे का क्या होगा। वहीं, दूसरी तरफ कई सारे ऐसे राज्य हैं, जो मजदूरों को 100 दिन का काम दिलाने में काफी पीछे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से अब तक करीब 6.8 लाख परिवारों अपने 100 दिन के कार्य को पूरा कर लिया है। हालांकि मनरेगा के तहत रोजगार प्राप्त कुल परिवारों में से यह सिर्फ 1.2 फीसदी ही है। इसके अलावा 51 लाख परिवारों ने 70 दिन का कार्य पूरा कर लिया है। सिर्फ कुछ ही राज्य अधिकतर परिवारों को 100 दिन कार्य दिलाने में सफल रहे हैं, जिसमें आंध्र प्रदेश 2.6 लाख, छत्तीसगढ़ 84 हजार, पश्चिम बंगाल 82 हजार और ओडिशा 52 हजार शामिल हैं।


