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87 साल की वृद्धा ने मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति तब हुई एफआईआर
15-Jun-2026 11:40 AM
87 साल की वृद्धा ने मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति तब हुई एफआईआर

पंच पर 90 लाख की संपत्ति हड़पने का आरोप, पुलिस पर घूस लेकर मामला दबाने का आरोप

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 15 जून। बिलासपुर जिले के बेलगहना क्षेत्र में 87 वर्षीय एक वृद्ध महिला द्वारा इच्छामृत्यु की अनुमति मांगे जाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचल मच गई। एसएसपी तक शिकायत पहुंचने के बाद एफआईआर दर्ज कर अब मामले की जांच की जा रही है।

जानकारी के अनुसार बेलगहना निवासी बालकुंवर बसोड़ अपने पति और तीन बेटों को खो चुकी हैं। वह बांस से झौवा-टुकनी बनाकर जीवनयापन करती हैं। उनकी एक बेटी उनके साथ रहती है और देखभाल करती है।

वृद्धा का आरोप है कि केंदा निवासी पंच फागुन प्रसाद प्रजापति उर्फ मोनू ने उनकी कमजोर स्थिति का फायदा उठाया। उसने बैंक केवाईसी और अन्य सरकारी कार्यों में मदद करने का भरोसा दिलाकर उनका विश्वास जीता।

शिकायत के मुताबिक 14 दिसंबर 2021 को आरोपी ने धोखे से उनके भारतीय स्टेट बैंक खाते से 23 लाख रुपये अपने खाते में स्थानांतरित कर लिए। इसके अलावा लूफा ग्राम पंचायत स्थित खसरा नंबर 763 और 991/2 की करीब ढाई हेक्टेयर कृषि भूमि भी अपने नाम करा ली। वृद्धा ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी उनके घर में रखे सोने-चांदी के जेवर भी ले गया।

बालकुंवर बसोड़ के अनुसार जुलाई और सितंबर 2022 में आरोपी उन्हें कोटा तहसील कार्यालय ले गया। वहां उसने कहा कि धान बेचने के लिए पंजीयन अनिवार्य है और कई दस्तावेजों पर उनके अंगूठे के निशान लगवा लिए।

बाद में जब वह धान बिक्री की जानकारी लेने सहकारी बैंक पहुंचीं तो पता चला कि उनके नाम से कोई धान बिक्री नहीं हुई है। इसके बाद पटवारी से जानकारी लेने पर उन्हें मालूम हुआ कि उनकी 6.34 एकड़ जमीन आरोपी के नाम दर्ज हो चुकी है।

वृद्धा का कहना है कि धान पंजीयन के नाम पर उनसे दस्तावेजों पर अंगूठा लगवाकर जमीन का नामांतरण करा लिया गया।

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि उनके दिवंगत पुत्र रमेश के नाम दर्ज एक सेंट्रो कार, एक्टिवा स्कूटर और छोटा हाथी वाहन पहले उनके नाम हस्तांतरित हुए थे।

आरोप है कि बाद में फागुन प्रजापति ने बीमा अवधि बढ़ाने और दस्तावेज अपडेट कराने का बहाना बनाकर फिर से कई कागजों पर अंगूठे लगवा लिए। कुछ समय बाद उनके पोते दीपक बिंकर ने जानकारी दी कि तीनों वाहन आरोपी के नाम स्थानांतरित हो चुके हैं।

वृद्धा और उनके परिजनों का कहना है कि न्याय के लिए उन्होंने बेलगहना चौकी, कोटा एसडीओपी कार्यालय और बिलासपुर एसपी कार्यालय के कई चक्कर लगाए। लेकिन लंबे समय तक जांच का हवाला देकर उन्हें टाल दिया गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बाद में आरोपी पक्ष से दो लाख रुपये लेने के बाद पुलिस ने मामले में आगे कार्रवाई योग्य तथ्य नहीं होने की बात कहते हुए अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया और उन्हें न्यायालय जाने की सलाह दी।

बीते दिनों बालकुंवर बसोड़ बिलासपुर आईजी कार्यालय पहुंचीं। वहां उनकी मुलाकात आईजी रामगोपाल गर्ग से नहीं हो सकी, लेकिन उन्होंने डीएसपी विवेक शर्मा को आवेदन सौंपकर पूरी घटना बताई।

उन्होंने न्याय नहीं मिलने की पीड़ा व्यक्त करते हुए इच्छामृत्यु की अनुमति देने का अनुरोध भी किया। डीएसपी ने मामले की समीक्षा कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। यहां से शिकायत एसएसपी दफ्तर भेजी गई। मामला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह तक पहुंचने के बाद उन्होंने जांच और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने फागुन प्रसाद प्रजापति के खिलाफ धोखाधड़ी, संपत्ति हड़पने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया।

वृद्धा का आरोप है कि पंच ने KYC, धान खरीदी पंजीयन और बीमा संबंधी कार्य कराने का झांसा देकर उसकी करीब 90 लाख रुपये की संपत्ति हड़पी है। उसने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई और इच्छामृत्यु की अनुमति भी मांगी थी।


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