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प्रतिनियुक्ति विवाद में हाईकोर्ट का निर्देश, 45 दिन में विभाग करे फैसला
15-Jun-2026 11:38 AM
प्रतिनियुक्ति विवाद में हाईकोर्ट का निर्देश, 45 दिन में विभाग करे फैसला

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 15 जून। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) से जुड़े एक मामले में दायर याचिका का निराकरण करते हुए याचिकाकर्ता को विभागीय अधिकारियों के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता प्रदान की है। अदालत ने सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि अभ्यावेदन प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाए।

यह आदेश न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पारित किया। मामले के अनुसार याचिकाकर्ता शंकर प्रसाद प्रजापति ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले के कोटमीकला स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास में छात्रावास अधीक्षक पद पर प्रतिनियुक्ति की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने 13 मार्च 2026 को जारी आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि वह याचिका वापस लेना चाहते हैं और विभाग के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करना चाहते हैं। उन्होंने न्यायालय से इस संबंध में अनुमति देने का अनुरोध किया।

याचिकाकर्ता की इस मांग को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत विभाग के समक्ष अपनी बात रखने की छूट दे दी। अदालत ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि याचिकाकर्ता अभ्यावेदन प्रस्तुत करते हैं तो उसके साथ उपलब्ध तथ्यों, दस्तावेजों और लागू नियमों का परीक्षण कर 45 दिनों के भीतर उचित निर्णय लिया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्णय पूरी तरह कानून और नियमों के आधार पर लिया जाएगा।

अपने आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। इसलिए विभागीय अधिकारी स्वतंत्र रूप से उपलब्ध तथ्यों और नियमों के अनुसार निर्णय लेंगे।

अदालत ने कहा कि सेवा संबंधी मामलों में पहले उपलब्ध विभागीय उपायों का उपयोग किया जाना चाहिए। इससे विवादों का समाधान प्रशासनिक स्तर पर ही तेजी से हो सकता है और अनावश्यक न्यायिक प्रक्रिया से बचा जा सकता है।


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