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किताबों के एक बहुत गंभीर पाठक ने अभी सोशल मीडिया पर शॉपिंग वेबसाइट अमेजान का एक स्क्रीनशॉट पोस्ट किया है। भारत के एक सबसे विख्यात लेखक राहुल सांकृत्यायन की किताब ‘किन्नर देश में’ का परिचय देते हुए अमेजान ने लिखा है कि इस किताब में लेखक ने तिब्बत और नेपाल के किन्नर (हिजड़ा) समाज के बारे में विस्तार से लिखा है। उन्होंने किन्नर समाज की रहन-सहन, रीति-रिवाज, और उनकी सामाजिक स्थिति पर विचार किया है। पुस्तक में सांकृत्यायन ने किन्नरों की सामाजिक असामानता, उनके साथ होने वाले भेदभाव, उनके संघर्षों को गंभीरता से चित्रित किया है। साथ ही उन्होंने इस समुदाय के प्रति समाज के रवैये को बदलने की जरूरत पर जोर दिया है।
किताबों के बारे में अक्सर ही लिखने वाले इस पाठक ने लिखा है कि यह किताब हिमालय के किन्नौर क्षेत्र के बारे में है, जिसका किन्नर (हिजड़ा) समाज से कुछ लेना-देना नहीं है। अमेजान ने या तो एआई का इस्तेमाल करके इस किताब का परिचय बनवा लिया है, या अमेजान के लिए परिचय लिखने वाले लेखक ने अपनी बुद्धि के बजाय एआई से इसे लिखवाया हो। यह कुछ उसी तरह का हो गया कि प्रेमचंद के ‘गोदान’ को गाय दान करने की शास्त्रीय विधि की किताब बता दिया जाए, या श्रीलाल शुक्ल की ‘राग दरबारी’ को शास्त्रीय संगीत सीखने की किताब बता दिया जाए। एआई का इस्तेमाल करते हुए जब लोग अपनी सहज बुद्धि का इस्तेमाल एकदम बंद कर देते हैं, तो इस तरह की कई चूक होती है। एआई शहीद चन्द्रशेखर आजाद से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर, और आज के उत्तर भारत के नौजवान दलित नेता चन्द्रशेखर तक कई चीजों को मिला सकता है, और मिलीजुली जानकारी भी पेश कर सकता है। अभी हमने एक एआई से मीनाक्षी नटराजन के चुनाव नामांकन के बारे में कुछ जानकारी मांगी, तो वह कुछ दूसरे ग्रह सरीखी जानकारी कई साल पहले की तारीखों की देते रहा। काफी देर झिक-झिक करने के बाद उसने माना कि वह गलती से मीनाक्षी लेखी के बारे में जानकारी दे रहा था। एक पत्रकार ने एआई से पूछा कि गांधी आज जिंदा रहते, तो क्या ट्वीट करते? जवाब में एआई ने कहा कि जैसा उन्होंने 2019 में ट्वीट किया था, वैसा करते। पिछले साल गूगल के एआई ने किसी के पूछने पर सलाह दी थी कि पिज्जा पर चीज चिपकाने के लिए कुछ गोंद मिला देना चाहिए। इंटरनेट के किसी मजाकिया पोस्ट को एआई ने सही मान लिया था, और अपनी उसी समझ को उसने किसी और के पूछने पर परोस दिया। एक से अधिक एआई ने यह पूछने पर कि अगर सूरज पश्चिम से उगे तो क्या होगा, उसके जवाब में कहा कि सूरज पश्चिम से उगेगा, तो फिर पूरब में डूबेगा। मतलब यह कि एआई ने सवाल को ही एक संभावना मान लिया।
एआई के साथ बातचीत करते हुए वह किसी भी बात के लिए यह नहीं कहता कि उसे नहीं मालूम है। इंसान जरूर यह कह सकते हैं कि इस बारे में उन्हें नहीं पता है, लेकिन एआई मनगढ़ंत बातों को लिखने लगता है, और कई बार तो वह खुद ही अपनी काल्पनिक बातों के झांसे में आकर उसी कल्पना को बढ़ाते चलता है। अभी किसी ने एआई की समझ परखने के लिए उससे सवाल किया कि शाकाहारी बाघों को क्या खिलाना चाहिए, तो एआई ने लंबी-चौड़ी सलाह लिखी- गाजर, पालक, सोयाबीन, और विटामिन सप्लीमेंट खिलाना चाहिए। उसने सवाल मे से शाकाहारी शब्द को पकड़ लिया, लेकिन बाघ शाकाहारी नहीं होते हैं, यह कॉमनसेंस उसके पास नहीं था। उसने सवाल की बेवकूफी पर कोई सवाल नहीं उठाया। एआई की अकल को परखने के लिए किसी ने पूछा कि उसके पास सौ रूपए हैं, और वह बीएमडब्ल्यू कंपनी की कौन सी कार खरीदे? एआई ने तुरंत ही बीएमडब्ल्यू के अलग-अलग मॉडल सुझाने शुरू कर दिए, जबकि इंसान अपनी मामूली जानकारी से भी यह कहते कि सौ रूपए भला कोई कार आएगी? लोग इंटरनेट पर व्यंग्य या तंज में कई बातें लिखते हैं। किसी ने कहीं लिखा होगा कि हिटलर को नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एआई जानकारी के समंदर में से ऐसे मजाक को भी एक सच और गंभीर जानकारी मानकर पेश कर देता है। इससे भी आगे बढक़र झूठ गढऩे में एआई का कोई मुकाबला नहीं है। वह किसी भी महान व्यक्ति का नाम किसी भी तीखे या महत्वपूर्ण बयान के साथ जोड़ देता है। उसने कुछ मामलों में गांधी के नाम से यह सूक्ति लिख दी- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही मानवता का भविष्य है। एआई ने स्वामी विवेकानंद के नाम से लिख दिया- इंटरनेट सारी मानव प्रजाति को एक करेगा।
भारत से लेकर अमरीका तक बहुत से ऐसे अदालती मुकदमे पकड़ाए हैं जिनमें किसी वकील ने अपनी जिरह तैयार करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया, और एआई ने उसे कुछ ऐसे पुराने फैसलों का हवाला दिया, जो कि अदालत में कभी चले भी नहीं थे। उसने अदालती नंबर, वादी-प्रतिवादी के नाम, इन सबके सहित जजों के नाम, और किस जज ने क्या फैसला लिखा था, यह सब भी दे दिया। मेहनत से बचने वाले वकील ने बिना किताबों में जांचे-परखे एआई पर अंधविश्वास करते हुए उस मामले को अदालत में लगा दिया। कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें जजों ने फैसला लिखने में एआई की मदद ली। अब हम यह संपादकीय लिखते हुए एक ऐसी स्थिति की कल्पना कर रहे हैं जो कि हो सकता है किसी देश में आ भी चुकी हो। एक वकील अपनी जिरह में एआई का गढ़ा जवाब लगा रहा है जिसमें काल्पनिक फैसलों का हवाला दिया गया है। दूसरा वकील इस जिरह को अपने एआई को देकर उससे जवाब बनवाता है, और उसका एआई भी जवाब में कुछ काल्पनिक फैसलों के काल्पनिक हिस्से जोडक़र तर्क बना देता है। अब अदालत के जज इन दोनों वकीलों के पेश किए गए तर्कों को एआई में डालकर उनका मूल्यांकन करते हैं, तो जज के इस्तेमाल किए जा रहे एआई से कुछ तीसरे काल्पनिक फैसलों का जिक्र करते हुए उन्हें एक फैसला सुझाया जाता है। अब दो काल्पनिक फैसलों के तर्कों पर जज तीसरे काल्पनिक तर्क देते हुए फैसला लिख रहा है! इसमें कुछ भी अनहोनी नहीं होगी। आज भी हिन्दुस्तान के कुछ जाने-माने अंग्रेजी अखबारों में समाचार के अंत में एआई के इस्तेमाल के सुबूत वाली ये लाइनें भी छप जाती हैं कि क्या इस पर कोई लेख या संपादकीय लिख दूं? एआई हर जानकारी के अंत में इस तरह का कोई न कोई प्रस्ताव रखते चलता है ताकि इस्तेमाल करने वाले लोग उससे बंधे रहें।
यह औजार बड़ा उपयोगी है, लेकिन यह दुधारी तलवार की तरह है, यह काम की जानकारी देते-देते झूठ भी परोसते चलता है। और हंसों को लेकर जो किस्सा चलता है कि वे चुग-चुग कर मोती खाते हैं, कुछ उसी तरह के इंसान एआई का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं, वरना जिस तरह इन दिनों गूगल का मैप बहुत से लोगों को ले जाकर खड्ड में गिरा देता है, उसी तरह एआई लोगों के लिए बहुत बड़ी शर्मिंदगी खड़ी कर सकता है। एक बार उस पर कुछ जानकारी ढूंढते हुए उसने पहले रमेश बैस को छत्तीसगढ़ का राज्यपाल बताया, फिर उसे बताया गया कि वे तो महाराष्ट्र के राज्यपाल थे, तो उसने माफी मांगते हुए छत्तीसगढ़ का राजभवन डॉ.रमन सिंह को सौंप दिया। इस पर भी उसकी गलती बताने पर वह कोई एक तीसरा नाम ढूंढ ले आया। फिर जब उसे बताया गया कि मौजूदा राज्यपाल रमेन डेका हैं, तो उसने माफी मांगते हुए कहा कि अब वह इस बात को अच्छी तरह याद रखेगा। एआई जानकारी देते हुए कई बार गपोड़ी बन जाता है, कई बार वह पेशेवर जालसाज की तरह गलत जानकारी देने लगता है, और कभी-कभी तो एक एआई की दी गई जानकारी के जब दूसरे एआई से फैक्ट चेक किया जाता है, तो वह बहुत से सही तथ्यों को भी झूठ बता देता है। देख-संभलकर ही इस दुधारी तलवार का इस्तेमाल करें, वरना पता लगेगा कि भिंडी काटने चले थे, और उंगलियां कटकर बिखर गईं।


