ताजा खबर

हैबियस कॉर्पस कोर्ट के आदेश पर जेल में बंद व्यक्ति के लिए नहीं- हाईकोर्ट
07-Jun-2026 12:25 PM
हैबियस कॉर्पस कोर्ट के आदेश पर जेल में बंद व्यक्ति के लिए नहीं- हाईकोर्ट

हत्या के आरोपी से जुड़े मामले में याचिका खारिज

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 7 जून। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को सक्षम न्यायालय के आदेश पर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है, तो ऐसी हिरासत को अवैध नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हैबियस कॉर्पस याचिका दायर कर रिहाई की मांग नहीं की जा सकती।

यह टिप्पणी जांजगीर-चांपा जिले के बिर्रा थाना क्षेत्र के करही गांव निवासी रविशंकर बघेल द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने उसके भाई गणपत बघेल को अवैध रूप से हिरासत में रखा है और उसे रिहा करने का निर्देश दिया जाए।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से प्रस्तुत अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि गणपत बघेल के खिलाफ बिर्रा थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की हत्या सहित अन्य गंभीर धाराओं तथा आर्म्स एक्ट की धाराएं लगाई गई थी।

राज्य पक्ष ने दस्तावेजों के साथ न्यायालय को अवगत कराया कि पुलिस ने आरोपी को 27 मई 2026 को चांपा स्थित न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) की अदालत में पेश किया था। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया था।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की खंडपीठ ने मामले पर विचार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि हैबियस कॉर्पस याचिका केवल उन्हीं मामलों में स्वीकार्य होती है, जहां किसी व्यक्ति को पूरी तरह गैरकानूनी या अवैध तरीके से हिरासत में रखा गया हो।

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जब किसी आरोपी को विधि सम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया हो और अदालत के आदेश पर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया हो, तब उसकी हिरासत को अवैध नहीं कहा जा सकता।

हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता के भाई का जेल में होना न्यायालय के वैध आदेश के तहत है। इसलिए इस मामले में हैबियस कॉर्पस याचिका बनाए रखने का कोई आधार नहीं बनता। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।  

 


अन्य पोस्ट