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शिकायत के आधार पर हुए तबादले पर तत्काल रोक नहीं, हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब
07-Jun-2026 12:24 PM
शिकायत के आधार पर हुए तबादले पर तत्काल रोक नहीं, हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 7 जून। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिकायत के आधार पर किए गए एक महिला शिक्षिका के तबादले पर अंतरिम रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने मामले को सुनवाई योग्य मानते हुए याचिका स्वीकार कर ली है और राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मामला गरियाबंद जिले में पदस्थ सहायक शिक्षिका बबीता ध्रुव का है। याचिका के अनुसार वह वर्तमान में मैनपुर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला मुदापारा में कार्यरत थीं। हाल ही में उनका तबादला देवभोग विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला बंडपारा कर दिया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि यह तबादला प्रशासनिक आवश्यकता के तहत नहीं किया गया, बल्कि एक शिकायत के आधार पर किया गया है। अधिवक्ता ने तर्क रखा कि शिकायत के आधार पर किया गया तबादला दंडात्मक और कलंकित करने वाला माना जा सकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने तबादला आदेश जारी करने से पहले शिक्षिका को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता पिछले साढ़े चार वर्षों से अधिक समय से उसी विद्यालय में पदस्थ हैं। अदालत ने माना कि यह अवधि सामान्य स्थानांतरण कार्यकाल से अधिक है। इस आधार पर न्यायालय ने तत्काल राहत देने से इंकार कर दिया।

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका में उठाए गए कानूनी प्रश्नों की जांच आवश्यक है। इसलिए स्थानांतरण आदेश की वैधता और उससे जुड़े तथ्यों की समीक्षा के लिए याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया है।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार तथा मामले से जुड़े अन्य शिक्षक को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत के आधार पर किया गया तबादला नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप था या नहीं।

 


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