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नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप और भारतीय ज्ञान परंपरा को मिला नया आधार
रायपुर, 29 मई। एनआईटी रायपुर में गुरुवार को शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता तथा सतत विकास से जुड़ी सात महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे ने की। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव, डीन, प्राध्यापक, कर्मचारी, छात्र, पूर्व छात्र एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान गोल्डन टॉवर की दूसरी मंजिल पर लगभग 5,500 वर्गफुट क्षेत्र में विकसित एनआईटी रायपुर एफआईई इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया। लगभग एक करोड़ की लागत से स्थापित यह छत्तीसगढ़ का पहला विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) समर्थित टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर है। वर्तमान में यह केंद्र क्लीन-टेक, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा बहुविषयक तकनीकी एकीकरण से जुड़े 50 से अधिक स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान कर रहा है।
इसके साथ ही गोल्डन टॉवर के सामने सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन का शुभारंभ भी किया गया। विद्युत मंत्रालय की रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल योजना के अंतर्गत स्थापित इस सुविधा में 60 किलोवाट क्षमता तक के दो एसी/डीसी चार्जर लगाए गए हैं।
समारोह में गोल्डन टॉवर के समीप उच्च-वोल्टेज इम्पल्स परीक्षण प्रयोगशाला की आधारशिला भी रखी गई। लगभग 9.12 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस जी+2 परियोजना के लिए सीएसपीटीसीएल ने एक करोड़ रुपये की सीएसआर सहायता प्रदान की गई है। यह अगले 15 माह में पूर्ण होने की संभावना है।
संस्थान के प्लेटिनम जुबली वर्ष के उपलक्ष्य में प्लेटिनम अतिथि गृह का भी शिलान्यास किया गया।
लगभग 13.27 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह जी+5 भवन 20 सुसज्जित कमरों, सम्मेलन कक्ष तथा आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा।
इससे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अतिथियों, विशेषज्ञों तथा गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत एवं आवास की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। परियोजना के 18 माह में पूर्ण होने की संभावना है।
इसके अतिरिक्त लगभग 25.57 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नए जी+6 अकादमिक एनेक्स-I भवन का उद्घाटन किया गया। लगभग 4,800 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र वाले इस भवन में 35 कक्ष बनाए गए हैं, जिनमें विभिन्न विभागों की कक्षाएँ एवं एनआईटीआरआर-एफआईई इनक्यूबेशन सेंटर संचालित होंगे।
समारोह के दौरान अकादमिक एनेक्स-I के पीछे प्रस्तावित मेकर्स्पेस एवं अनुसंधान सुविधा भवन की आधारशिला भी रखी गई। लगभग 16.91 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस जी+2 भवन में मेकर्स्पेस एवं टिंकरिंग प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। अनुसंधान परियोजना ब्लॉक भी विकसित किया जाएगा। यह परियोजना 12 माह में पूर्ण होने की संभावना है।
कार्यक्रम में केंद्रीय पुस्तकालय में भारतीय ज्ञान परंपरा अनुभाग का शुभारंभ किया। भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र द्वारा स्थापित इसमें भारतीय दर्शन, विज्ञान, साहित्य, गणित, आयुर्वेद, वास्तु, योग एवं अन्य पारंपरिक ज्ञान-विषयों से संबंधित पुस्तकें, पांडुलिपियाँ, जर्नल एवं संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराई गई हैं।
इस अवसर पर
डॉ. हावरे ने संस्थान की योजना एवं विकास टीम की समयबद्ध कार्यान्वयन क्षमता की सराहना की।
संस्थान के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने इन परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन में योगदान देने वाले सभी हितधारकों को बधाई दी।


