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नैनो खाद के उपयोग को बढ़ावा दे रहे - नेताम
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 26 मई । सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने आज बताया कि छत्तीसगढ़ के किसानों को अब यूरिया और डीएपी (DAP) जैसी रासायनिक खाद केवल टोकन के आधार पर ही मिलेगी। सहकारी समितियों और केंद्रों में खाद की सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार ने यह नई वितरण व्यवस्था लागू की है, ताकि किसानों को खाद के लिए लंबी लाइनों में न लगना पड़े। खाद प्राप्त करने के लिए किसानों को पहले टोकन लेना होगा। इसका उद्देश्य खाद की कालाबाजारी को रोकना और सभी किसानों को उनकी आवश्यकता व भूमि के रकबे (जमीन) के आधार पर सही मात्रा में खाद उपलब्ध कराना है।
किसान अपनी सुविधा के अनुसार तारीख और समय चुनकर टोकन प्राप्त कर सकेंगे, जो कुछ निर्धारित समय (जैसे 72 घंटे तक) के लिए मान्य रहेगा।
वहीं कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि राज्य में अभी 9.29 लाख टन विभिन्न प्रकार के रासायनिक खाद उपलब्ध हैं।केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को 15.55 लाख टन उर्वरक का लक्ष्य आवंटित हैं।
नेताम ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार कर रही है। राज्य सरकार किसानों के धान बुआई एवं उत्पादन प्रभावित न हो इस उद्देश्य से तरल नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का स्टॉक भी समानांतर रूप से भण्डारित करने की रणनीति पर भी कार्य कर रही है।कृषि विभाग ने नैनो डीएपी के उपयोग की वैज्ञानिक विधि भी किसानों को बताई है। प्रथम चरण में आधार खाद के रूप में 25 किलोग्राम डीएपी अथवा 75 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट अथवा 38 किलोग्राम 12-32-16 मिश्रित उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी गई है। दूसरे चरण में बीज उपचार हेतु 150 मिली नैनो डीएपी को 3 लीटर पानी में मिलाकर बीज उपचार करने तथा पौध उपचार हेतु 250 मिली नैनो डीएपी को 50 लीटर पानी में घोलकर पौधों की जड़ों को उपचारित करने की जानकारी दी गई है। तीसरे चरण में फसल रोपाई के लगभग 30 दिन बाद 250 मिली नैनो डीएपी को 125 लीटर पानी में मिलाकर खड़ी फसल में छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में किसानों को पात्रता अनुसार खाद्य मिले यह सुनिश्चित किया जा रहा है। खाद्य वितरण व्यवस्था का राज्य स्तर पर लगातार मॉनीटरिंग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों के गठन के निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर उर्वरकों में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।


