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देर-सबेर डी लिस्टिंग होकर रहेगी-अरविंद नेताम
26-May-2026 5:01 PM
देर-सबेर डी लिस्टिंग होकर रहेगी-अरविंद नेताम

ये मांग अनावश्यक है-मिंज

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 26 मई। दिल्ली में जनजाति सांस्कृतिक संगम के बाद प्रदेश में डी लिस्टिंग की मांग जोर पकड़ रही है। इसके समर्थन, और विरोध में आवाज उठ रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम का मानना है कि देर सबेर डी लिस्टिंग होकर रहेगी। जबकि प्रदेश में इसके विरोध की अगुवाई कर रहे  पूर्व संसदीय सचिव यूडी मिंज का कहना है कि डी लिस्टिंग की मांग अनावश्यक है।

देशभर के आदिवासी समाज के लोग रविवार को दिल्ली के लालकिला मैदान में जुटे थे। इसमें आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी संस्कृति, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के समर्थन में प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में धर्मांतरण करने वाले आदिवासियों को एसटी की सूची से बाहर करने की मांग की गई। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन की मांग भी जोरशोर से की गई।

छत्तीसगढ़ से वनवासी सुरक्षा मंच के बैनर तले पूर्व मंत्री गणेशराम भगत और सांसद भोजराम नाग डी लिस्टिंग की मांग की अगुवाई कर रहे हैं। लालकिला मैदान के कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मौजूद थे। साथ ही यहां से सीएम विष्णुदेव साय, मंत्री रामविचार नेताम, और सांसद, विधायकों ने शिरकत की। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम भी कार्यक्रम में शरीक होने वाले थे, लेकिन वो अस्वस्थता की वजह से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए।

उन्होंने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन बहुत अच्छा हुआ है। डी लिस्टिंग  और अन्य विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर इसकी तैयारी की गई थी। हम लोगों ने आरएसएस के नेताओं के सामने मांग रखी थी कि एक साथ लाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। यह नाजुक मसला है, और धीरे-धीरे राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय हो जाता है। ऐसे में सरकार को सोचना पड़ता है।

नेताम ने कहा कि देशभर से समाज के अलग-अलग तरीके से लगे रहे हैं। उन्होंने कहा कि देर सबेर डी लिस्टिंग होकर रहेगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी धर्मांतरण के लिए कड़ा कानून बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। धीरे-धीरे समाज की भावनाओं के मुताबिक कदम उठाए जा रहे हैं।

दूसरी तरफ, डी -लिस्टिंग की मांग के विरोध में जशपुर में रविवार को प्रदर्शन भी हुआ। पूर्व संसदीय सचिव यूडी मिंज और गीता उरांव ने इसकी अगुवाई की। मिंज ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में डी लिस्टिंग पर कहा कि हम लोग संविधान को मानने वाले लोग हैं। ये (डी लिस्टिंग) उससे बाहर की चीजें हैं। अनावश्यक राजनीतिक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।

मिंज ने कहा कि हम लोगों के रीति-रिवाज, और जन्म से लेकर मृत्यु तक रिवाज पुरानी परंपरा से चली आ रही है। जशपुर जिले में 62 फीसदी लोग आदिवासी समाज के हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में रौतिया और अन्य समाज को आदिवासी समाज में जोडऩे के लिए टीआरआई के माध्यम से फाईल दिल्ली भिजवाई भी गई थी।


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