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कोरबा की महिला की याचिका खारिज
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 25 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी जमीन के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद उसका डायवर्सन अनुमति नहीं दी जा सकती, चाहे अधिग्रहण रेलवे परियोजना के लिए हो या किसी अन्य सरकारी योजना के लिए।
न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने कोरबा निवासी उमा देवी अग्रवाल की याचिका खारिज करते हुए कलेक्टर, कमिश्नर और राजस्व मंडल के आदेशों को सही ठहराया।
मामले के अनुसार उमा देवी अग्रवाल ने 1 अक्टूबर 2015 को अपनी जमीन के डायवर्सन के लिए आवेदन किया था। इसके बाद 30 नवंबर 2015 को रेलवे एक्ट 1989 की धारा 20ए के तहत उसी जमीन के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी गई।
इसके बावजूद 31 मार्च 2016 को जमीन डायवर्सन का आदेश जारी हो गया। बाद में मामले की जानकारी मिलने पर कलेक्टर ने आदेश की समीक्षा कर डायवर्सन निरस्त कर दिया।
महिला ने तर्क दिया कि उसने रेलवे अधिग्रहण अधिसूचना जारी होने से पहले ही डायवर्सन के लिए आवेदन कर दिया था, इसलिए कलेक्टर द्वारा आदेश निरस्त करना गलत है।
लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि एक बार अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया शुरू होने और अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित जमीन के संबंध में अन्य प्रशासनिक अनुमति नहीं दी जा सकती।
इस फैसले के साथ ही हाईकोर्ट ने महिला की याचिका खारिज कर दी।


