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असम सरकार ने सोमवार को यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) पर एक बिल विधानसभा में पेश किया, जिसमें बहुविवाह (एक से ज़्यादा शादी) पर रोक लगाने और लिव-इन रिश्तों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन करने की बात कही गई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने ‘यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 बिल’ विधानसभा में रखा.
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस क़दम का विरोध करते हुए कहा कि इसे लागू करने से पहले सभी पक्षों से चर्चा होनी चाहिए.
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “पहली बार बिल में लिव-इन रिश्तों को क़ानूनी रूप दिया जा रहा है. अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से पार्टनर्स और ऐसे रिश्तों से पैदा हुए बच्चों के अधिकारों को मान्यता मिलेगी.”
हालांकि, बिल में कहा गया है कि यह असम में रहने वाले किसी भी अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होगा.
गुजरात विधानसभा में पास हुआ था यूसीसी बिल
गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च को यूसीसी बिल पास किया था, जिसमें कहा गया है कि शादी, तलाक़, उत्तराधिकार और लिव-इन रिश्तों से जुड़ा एक ही कानून होगा. यानी अलग-अलग धर्मों के अलग-अलग क़ानून नहीं होंगे.
बिल में कहा गया है कि अगर शादी ज़बरदस्ती, दबाव या धोखे से कराई जाती है तो 7 साल तक जेल की सज़ा होगी. इसमें बहुविवाह पर रोक और लिव-इन का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी किया गया है. (bbc.com/hindi)


