ताजा खबर

गर्भपात के बाद दोबारा मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं कर सकते- हाईकोर्ट
25-May-2026 11:17 AM
गर्भपात के बाद दोबारा मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं कर सकते- हाईकोर्ट

वेतन से काटे गए 80 हजार रुपये भी लौटाने के आदेश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 25 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कामकाजी महिलाओं के मातृत्व अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि गर्भपात या चिकित्सकीय जटिलताओं के बाद दोबारा गर्भवती होने पर महिला कर्मचारी को नए सिरे से पूर्ण मातृत्व अवकाश का अधिकार मिलेगा। पहले लिए गए अवकाश को आधार बनाकर इस अधिकार को रोका नहीं जा सकता।

न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने रायपुर स्थित भारतीय खाद्य निगम में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 महिला कर्मचारी के मामले में यह निर्णय दिया। अदालत ने महिला के वेतन से काटी गई 80,254 रुपये की राशि वापस करने के आदेश भी दिए हैं।

मामले के अनुसार महिला कर्मचारी वर्ष 2019 में गर्भवती हुई थी और जुड़वा बच्चों की उम्मीद थी। 25 अप्रैल 2019 को गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण एक भ्रूण का गर्भपात हो गया। डॉक्टरों की निगरानी और लंबे बेड रेस्ट के बाद 3 सितंबर 2019 को उसने समय से पहले एक बच्ची को जन्म दिया।

इसके बाद महिला ने मातृत्व अवकाश और चिकित्सा खर्चों के भुगतान के लिए आवेदन किया। लेकिन विभाग ने उसे केवल 68 दिन का असाधारण अवकाश स्वीकृत किया। इतना ही नहीं, अवकाश शेष नहीं होने का हवाला देकर उसके वेतन से 80,254 रुपये की कटौती भी कर ली गई। इससे परेशान होकर महिला ने हाईकोर्ट की शरण ली।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मातृत्व अवकाश और गर्भपात से जुड़े नियमों के तहत महिला 90 दिन के अवकाश की हकदार है। विभाग मनमाने तरीके से इस अवधि को कम नहीं कर सकता।

अदालत ने वेतन से की गई कटौती को अवैध बताते हुए राशि लौटाने के निर्देश दिए। साथ ही महिला के 3.76 लाख रुपये के लंबित मेडिकल बिलों की दोबारा जांच कर उचित आदेश पारित करने को भी कहा है।

अदालत ने मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 का हवाला देते हुए कहा कि मातृत्व अवकाश महिला का वैधानिक और संवैधानिक अधिकार है। यह उसके सम्मान, स्वास्थ्य और गरिमा से सीधे जुड़ा हुआ है।


अन्य पोस्ट