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फार्मेसी काउंसिल रजिस्ट्रार को पद से हटाने का फैसला डीबी ने पलटा
21-May-2026 12:21 PM
फार्मेसी काउंसिल रजिस्ट्रार को पद से हटाने का फैसला डीबी ने पलटा

नियमित नियुक्ति तक अतिरिक्त प्रभार जारी रहेगा, राज्य सरकार को 8 हफ्ते में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 21 मई। छत्तीसगढ़ राज्य फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार पद को लेकर चल रहे विवाद पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने सिंगल बेंच के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे अधिकारी को पद से हटाने का निर्देश दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने माना कि नियमित नियुक्ति होने तक किसी अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार देना केवल अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है। इसे वैधानिक नियमित नियुक्ति नहीं मानी जा सकती।

मालूम हो कि डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल रायपुर में पदस्थ फार्मासिस्ट अश्विनी गुरडेकर को 14 मार्च 2024 को राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार का अतिरिक्त प्रभार सौंपा था।

इस नियुक्ति को चुनौती देते हुए डॉ. राकेश गुप्ता ने याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि यह नियुक्ति फार्मेसी काउंसिल नियम 1978 के विपरीत है। सिंगल बेंच ने याचिका स्वीकार करते हुए आदेश निरस्त कर दिया था, जिसके खिलाफ रिट अपील दायर की गई।

डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत क्वो वारंटो की रिट तभी जारी की जा सकती है, जब कोई व्यक्ति नियमित नियुक्ति के आधार पर किसी वैधानिक सार्वजनिक पद पर बैठा हो और उसकी नियुक्ति कानून के विरुद्ध हो। अतिरिक्त प्रभार की स्थिति में यह शर्त पूरी नहीं होती।

अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि फार्मेसी एक्ट 1948 और फार्मेसी काउंसिल नियम 1978 के तहत रजिस्ट्रार पद पर नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी की जाए। तब तक अश्विनी गुरडेकर अतिरिक्त प्रभार के रूप में कार्य करते रहेंगे।


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