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कटघोरा तहसील गेट पर पांच घंटे तक गरजे भू-विस्थापित
21-May-2026 12:13 PM
कटघोरा तहसील गेट पर पांच घंटे तक गरजे भू-विस्थापित

एसईसीएल पर रोजगार और मुआवजे में देरी का आरोप, पुलिस ने एसडीएम दफ्तर जाने से रोका

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कोरबा, 21 मई। कुसमुंडा खदान विस्तार से प्रभावित गांवों के भू-विस्थापितों का गुस्सा बुधवार को कटघोरा तहसील परिसर के बाहर फूट पड़ा। एसडीएम कार्यालय का घेराव करने पहुंचे ग्रामीणों को पुलिस ने मुख्य गेट पर ही रोक दिया, जिसके बाद विस्थापित वहीं धरने पर बैठ गए और एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह प्रदर्शन करीब पांच घंटे तक चलता रहा।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। भू-विस्थापितों का आरोप है कि एसईसीएल ने वर्षों पहले जमीन अधिग्रहित कर ली, लेकिन अब तक न तो रोजगार प्रक्रिया पूरी की गई और न ही अधिकांश गांवों में मुआवजा वितरण का काम शुरू हुआ।

कुसमुंडा विस्तार परियोजना के लिए जतराज, पड़निया, सोनपुरी, पाली, रिसदी, खोदरी, चुरैल, अमगांव, खैरभावना और गेवराबस्ती समेत कई गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई है। प्रभावित लोगों का कहना है कि पुनर्वास स्थल तक तय नहीं किए गए हैं, जिससे विस्थापन की समस्या और गंभीर होती जा रही है।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि भूमि अधिग्रहण के बाद कई गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक लग गई, जबकि प्रशासनिक प्रक्रियाएं बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं। इससे लोगों की आर्थिक और सामाजिक परेशानियां बढ़ गई हैं।

विस्थापितों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में एसईसीएल ने अधिग्रहण वाले गांवों का ड्रोन सर्वे कराया था, लेकिन ग्रामीणों को इसकी जानकारी नहीं दी गई और न ही ग्राम सभा की सहमति ली गई। अब उसी सर्वे के आधार पर संपत्तियों का आकलन किया जा रहा है, जिसमें नए बने मकानों का पूरा मुआवजा नहीं मिल रहा।

धरना खत्म कराने के लिए प्रशासन और विस्थापितों के बीच त्रिपक्षीय चर्चा हुई। इसके बाद तहसीलदार ने 29 मई को सुबह 11 बजे चंद्रनगर जतराज में बैठक आयोजित करने का फैसला लिया। इसमें राजस्व विभाग, एसईसीएल दीपका और कुसमुंडा प्रबंधन के अधिकारी मौजूद रहेंगे। आश्वासन के बाद शाम करीब 5 बजे भू-विस्थापितों ने धरना समाप्त किया।


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